खास बातें
- ओएनजीसी में स्वतंत्र निदेशकों का मसला जल्द सुलझने की उम्मीद है। सरकार की योजना चालू तिमाही में ही कंपनी का एफपीओ लाने की है।
New Delhi: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) में स्वतंत्र निदेशकों का मसला जल्द सुलझने की उम्मीद है। सरकार की योजना चालू तिमाही में ही कंपनी का अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) लाने की है। इसके अलावा इसी तिमाही पीएफसी और सेल में भी विनिवेश हो सकता है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, हम ओएनजीसी में स्वतंत्र निदेशकों का मसला सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। कंपनी का एफपीओ जून में समाप्त होने वाली तिमाही में आ सकता है। ओएनजीसी बाजार नियामक सेबी के निदेशक मंडल में समान संख्या में कार्यकारी और स्वतंत्र निदेशकों के मानदंड को पूरा नहीं करती है। ऐसे में सरकार ने कंपनी के बोर्ड से अपने दोनों मनोनीत निदेशकों को हटाने की योजना बनाई थी, जिससे कंपनी इस मानदंड को पूरा कर सके। पर इस कदम से ओएनजीसी अपना नवरत्न का दर्जा गंवा सकती है। नवरत्न का दर्जा हासिल कंपनी के निदेशक मंडल को एक हजार करोड़ रुपये तक के निवेश के लिए स्वायत्तता मिलती है। सरकार की योजना ओएनजीसी में अपनी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी या 42.77 करोड़ शेयर बेचकर 12,000 करोड़ रुपये जुटाने की है। पहले कंपनी का एफपीओ मार्च में आना था, पर इसे टाल दिया गया।