यह ख़बर 19 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'1 लाख करोड़ की विदेशी सहायता का इस्तेमाल नहीं'

खास बातें

  • मंत्रालयों की योजना व्यवस्था में कमियों के चलते भारत को विदेशों से मिली 1 लाख करोड़ रुपये की सहायता राशि का इस्तेमाल नहीं हो सका है।
New Delhi:

शहरी विकास, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे मंत्रालयों की योजना व्यवस्था में कमियों के चलते भारत को विदेशों से मिली 1 लाख करोड़ रुपये की सहायता राशि का इस्तेमाल नहीं हो सका है। यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद को दी गयी ताजा रपट में दी गयी है। रिपोर्ट में कहा है, 31 मार्च 2010 तक देश मिले विदेशी सहायता राशि में से 1,05,399 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं कर पाया है। बहुपक्षीय और द्विपक्षीय रिण प्रदाता एजेंसियों द्वारा दिए गए धन के समय से इस्तेमाल नहीं करने के एवज में सरकार को 2009-10 के दौरान 86.11 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ा। रिपोर्ट में कैग ने कहा पर्याप्त नियोजन नहीं करने की वजह से 86 करोड़ रुपये बेवजह खर्च करना पड़ा। रिपोर्ट में 16 विभागों से संबंधित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जो विदेशी सहायता राशि के तौर पर मिले 1. 05 लाख करोड़ रुपये का इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं। इन क्षेत्रों में शहरी विकास :23,883 करोड़ रुपये:, सड़क :11,617 करोड़ रुपये:, कृषि और ग्रामीण विकास :9,557 करोड़ रुपये :, जलापूर्ति और साफ-सफाई :8,995 करोड़ रुपये: और बिजली :7,959 करोड़ रुपये:शामिल हैं। इसके अलावा रेलवे, स्वास्थ्य, पर्यावरण और वन, परमाणु ऊर्जा और ग्रामीण विकास क्षेत्र भी मिले विदेशी सहायता राशि का पूरा इस्तेमाल करने में नकाम रहे हैं। भारत को विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और जापान, फ्रांस तथा जर्मनी जैसे विकसित देशों से वित्तीय सहायता मिलती है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस सहायता से जुड़ी प्रतिबंधताएं पूरी न होने के कारण वर्ष 2009-10 के दौरान 53. 26 करोड़ रुपये एडीबी और 27. 28 करोड़ रुपये विश्व बैंक को जुर्माना चुकाया।


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