खास बातें
- सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों का नुकसान अगले वित्त वर्ष में 98,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
मुंबई: विश्व बाजार में आने वाले महीनों में भी कच्चे तेल के दाम यदि 100 डॉलर प्रति बैरल के ईदगिर्द ही टिके रहते हैं तो सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों का नुकसान अगले वित्त वर्ष में 98,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। ब्रोकर फर्म आईआईएफएल की एक रिपोर्ट में यह अनुमान व्यक्त करते हुए कहा गया है कि फरवरी में कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को छूने के बाद यह माना जा रहा था कि तेल कंपनियों की कम वसूली चालू वित्त वर्ष में 72,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। इंडिया इंफोलाइन रिसर्च के विशेषज्ञ प्रायेश जैन ने कहा कि यदि कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही बने रहते हैं और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता है तो अगले वित्त वर्ष में पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री करने वाली तेल विपणन कंपनियों की कुल कम वसूली 98,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दूर नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से दिसंबर 2010 की अवधि में जब कच्चे तेल के दाम औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहे थे तब तेल कंपनियों की कम वसूली 47,000 करोड़ रुपये तक आंकी गई। बहरहाल, चौथी तिमाही में कच्चे तेल के दाम औसतन 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बने हुए हैं। इससे तेल कंपनियों की कम वसूली 25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने की आशंका है। इसे मिलाकर चालू वित्त वर्ष में इनकी कम वसूली 72,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, लेकिन स्थिति में यदि सुधार नहीं होता है तो अगले वित्त वर्ष में यह एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।