खास बातें
- केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि कर कानूनों में प्रस्तावित सुधार का मकसद पुराने मामलों को खोलना नहीं है, बल्कि इसका मकसद निवेशकों को दोहरे कराधान से बचाना है।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि कर कानूनों में प्रस्तावित सुधार का मकसद पुराने मामलों को खोलना नहीं है, बल्कि इसका मकसद निवेशकों को दोहरे कराधान से बचाना है।
मुखर्जी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा, "मैं उद्योग जगत को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि पुराने मामले को खोलने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि कानून में इसकी इजाजत नहीं है।"
इस महीने आम बजट 2012-13 पेश करते हुए वित्तमंत्री ने वोडाफोन-हचिसन सौदे जैसे विदेश में हुए सौदों को कर दायरे में लाने के लिए प्रतिगामी प्रभाव के साथ आयकर अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक ऐसे मामलों में 40 हजार करोड़ रुपये के कर पर विवाद है।
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में वोडाफोन-हचिसन सौदे में आयकर विभाग के 11 हजार करोड़ रुपये के कर की मांग को खारिज कर दिया था।
सीआईआई के इस सम्मेलन में उद्योगपतियों को सम्बोधित करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित सुधार के पीछे प्रतिशोध की भावना या कोई विचार थोपना नहीं है। उन्होंने कहा कि संशोधन का मकसद पुराने मामले को फिर से खोलना नहीं बल्कि निवेशकों को दोहरे कराधान से बचाना है।