खास बातें
- अदालत ने अपने आदेश में रिहायशी परियोजना के लिए ली गई जमीन उसके मूल मालिकों को लौटाने को कहा है।
नई दिल्ली: अदालती आदेश के बाद राष्ट्रीय राजधानी में नोएडा एक्सटेंशन में घर की मांग में कम से कम 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। अदालत ने अपने आदेश में रिहायशी परियोजना के लिए ली गई जमीन उसके मूल मालिकों को लौटाने को कहा है। जमीन-जायदाद का विकास करने वाले तथा सलाहकारों का कहना है कि घर खरीदने वाले संभावित खरीदार नोएडा एक्सटेंशन में किसी भी प्रकार की खरीद के लिए 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपना रहे हैं। अदालत के आदेश के बाद मांग में कमी आई है। नोएडा एक्सटेंशन ग्रेटर नोएडा का हिस्सा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा 150 एकड़ से अधिक जमीन के अधिग्रहण को गैर-सूचीबद्ध कर दिया है और पूरी जमीन उसके मूल मालिकों को लौटाने को कहा है। जमीन-जायदाद के बारे में परामर्श देने वाली वैश्विक कंपनी जोन्स लांग लासाले (भारत) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (परिचालन) संतोष कुमार ने कहा, अदालत के फैसले का निश्चित तौर पर नोएडा एक्सटेंशन में घरों की मांग पर असर पड़ा है। खरीदार इस समय परेशान हैं और वे देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं।