यह ख़बर 28 जनवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

रिजर्व बैंक ने कहा, ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम

खास बातें

  • ऊंची मुद्रास्फीति तथा चालू खाते के घाटे (सीएडी) में वृद्धि का हवाला देते हुए रिजर्व बैंक ने कहा कि मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती जैसे मौद्रिक उपायों की संभावना सीमित ही है।
मुंबई:

ऊंची मुद्रास्फीति तथा चालू खाते के घाटे (सीएडी) में वृद्धि का हवाला देते हुए रिजर्व बैंक ने कहा कि मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती जैसे मौद्रिक उपायों की संभावना सीमित ही है। केंद्रीय बैंक मंगलवार को तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा करेगा।

रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा की पूर्व संध्या पर वृहत आर्थिक तथा मौद्रिक विकास पर अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘मौजूदा नरमी के पीछे गैर-मौद्रिक तत्व हैं और उच्च मुद्रास्फीति, चालू खाते का घाटा तथा राजकोषीय घाटे को लेकर जोखिम बना हुआ है, ऐसे में समर्थनकारी मौद्रिक नीति उपाय करना कठिन है।’

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा कि सरकार आर्थिक सुधार को बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है, ऐसे में मौद्रिक नीति में आर्थिक वृद्धि को गति देने के उपायों पर गौर करना संभव होगा।

उधर, रिजर्व बैंक के पेशेवर अनुमान सर्वेक्षण में चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 5.6 प्रतिशत से कम कर 5.5 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही अगले वित्त वर्ष के आर्थिक वृद्धि के अनुमान को पूर्व के 6.6 प्रतिशत से कम कर 6.5 प्रतिशत किया गया है।

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मुद्रास्फीति के बारे में केंद्रीय बैंक ने कहा कि मार्च के अंत तक मुद्रास्फीति 7.5 प्रतिशत रहने का जो अनुमान है, जिसमें और नरमी की संभावना है। लेकिन छुपी.दबी मुद्रास्फति 2013-14 में मुद्रास्फीति के लिये प्रमुख खतरा बना रहेगी।