खास बातें
- कार्यालय स्थलों के किराये की दृष्टि से अक्टूबर-दिसंबर, 2010 की तिमाही में मुंबई एशिया-प्रशांत का चौथा सबसे महंगा शहर रहा है।
New Delhi: कार्यालय स्थलों के किराये की दृष्टि से अक्टूबर-दिसंबर, 2010 की तिमाही में मुंबई एशिया-प्रशांत का चौथा सबसे महंगा शहर रहा है। मुंबई में दफ्तरों का किराया शंघाई, सोल और सिडनी जैसे शहरों से भी अधिक है। वैश्विक रीयल्टी परामर्शक जोंस लैंग लासाले के अनुसार, इस क्षेत्र के 26 सबसे महंगे शहरों की सूची में दिल्ली 10वें स्थान पर रही है। दफ्तरों के किराये की दृष्टि से क्षेत्र का सबसे महंगा शहर हांगकांग रहा है। इसके बाद तोक्यो और सिंगापुर का नंबर आता है। हांगकांग में इस दौरान दफ्तरों के किराये की दर औसतन 1,511 डॉलर प्रति वर्ग मीटर की रही, वहीं तोक्यो में यह 752 डॉलर प्रति वर्ग मीटर और सिंगापुर में 747 डॉलर प्रति वर्ग मीटर रही है। मुंबई में दफ्तर किराये पर लेने के किसी भी कंपनी को औसतन 705 डॉलर प्रति वर्ग मीटर का भुगतान करना होगा। दिल्ली में यह दर 503 डॉलर प्रति वर्ग मीटर की बैठती है। बेंगलुरु सूची में 24वें और चेन्नई 26वें स्थान पर है। बेंगलुरु में औसत किराया 136 डॉलर प्रति वर्ग मीटर और चेन्नई में 124 डॉलर प्रति वर्ग मीटर है। अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही के दौरान मुंबई में कार्यालय स्थल के किरायों में इससे पिछली तिमाही के मुकाबले 3.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जबकि दिल्ली में यह 3.2 प्रतिशत और बेंगलुरु में 5.6 फीसदी बढ़ा।