यह ख़बर 14 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

सकल मुद्रास्फीति नवंबर में घटकर 9.11% हुई

खास बातें

  • प्याज, आलू और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी से नंवबर में सकल मुद्रास्फीति घटकर 9.11 फीसदी रह गई।
New Delhi:

प्याज, आलू और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी से नंवबर में सकल मुद्रास्फीति पिछले महीने की तुलना में आधा फीसदी से कुछ अधिक घटकर 9.11 फीसदी रह गई। मंहगाई दर में गिरावट को देखते हुए रिजर्व बैंक शुक्रवार को जारी होने वाली मध्य तिमाही समीक्षा में मौद्रिक नीति में सख्ती की रणनीति से कदम वापस खींच सकता है। थोकमूल्य सूचकांक के आधार पर आंकलित सकल मुद्रास्फीति अक्तूबर 2011 में 9.73 फीसदी रही थी। एक साल पहले नवंबर 2010 में यह 8.2 फीसदी पर थी। औद्योगिक उत्पादन और रुपये में भारी गिरावट के निराशाजनक आर्थिक माहौल के बीच मुद्रास्फीति में गिरावट राहत पहुंचाने वाली खबर है। औद्योगिक उत्पादन में अक्तूबर के दौरान 5.1 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 53 के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। मुद्रास्फीति में कमी के साथ सबकी निगाहें अब आरबीआई की 16 दिसंबर को आने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिक गई हैं। केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने लिए मार्च 2010 से लगातार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहा है लेकिन पिछली समीक्षा में आरबीआई ने संकेत दिया था कि वह दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा। आज यहां जारी आंकड़ों के मुताबिक समीक्षाधीन अवधि में खाद्य मुद्रास्फीति 8.54 फीसदी रही जो पिछले साल नवंबर महीने में 10.14 फीसदी थी। मूल्यवृद्धि की बात की जाए तो अक्तूबर माह में खाद्य वस्तुओं की मूल्यवृद्धि अक्तूबर 2011 में 14.64 फीसदी रही। सालाना आधार पर प्राथमिक उत्पादों की मूल्यवृद्धि दर भी घटकर नवंबर में 8.53 फीसदी रह गई जो पिछले साल समान अवधि में 14.67 फीसदी थी। अक्तूबर 2011 में इस खंड की मंहगाई दर 18.09 फीसदी रही थी। आज जारी आंकड़े के मुताबिक नवंबर 2011 के दौरान विनिर्मित उत्पाद खंड की मुद्रास्फीति 7.7 फीसदी रही जो नवंबर 2010 में 5.02 फीसदी थी और अक्तूबर 2011 में 7.6 फीसदी रही थी। इस महीने सब्जियों की मंहगाई 12 फीसदी रही जो अक्तूबर 2011 में 21.76 फीसदी थी। इधर, प्याज की कीमत नवंबर में 34 फीसदी घटी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में प्याज 36.82 फीसदी मंहगा हुआ था। इसी तरह आलू और दूध में भी सालाना स्तर पर कीमत में कमी आई।


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