मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (Monetary Policy Committee) की बैठक के बाद RBI ने 8 फरवरी को ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का ऐलान किया था. आज MPC के मिनट्स जारी किए गए हैं जिनमें कई अहम बातें निकल कर सामने आईं.
मिनट्स से पता चलता है कि ब्याज दरों को लेकर कमिटी के सदस्यों की राय बंटी हुई रही. इन मिनट्स के मुताबिक, जहां RBI की MPC के सदस्य हर हाल में महंगाई के लक्ष्य को काबू करने को लेकर प्रतिबद्ध दिखे, वहीं बाहरी सदस्य जयंत आर वर्मा ने ब्याज दरें बढ़ाने का विरोध किया था. वो ग्रोथ से समझौते के मुद्दे पर सावधानी बरतने के पक्ष में नजर आए.
वर्मा ने कहा था कि महंगाई के घटने के अनुमान के बीच, MPC के बहुमत से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की जरूरत नहीं थी. जयंत वर्मा के अलावा आशिमा गोयल ने भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया था.
वर्मा ने कहा था कि 2021-22 की दूसरी छमाही में मौद्रिक नीति, महंगाई के स्तर पर संतुष्ट दिख रही थी और हम 2022-23 में जरूरत से ज्यादा महंगाई के रूप में इसकी कीमत चुका रहे हैं.
MPC की बैठक के मिनट्स के मुताबिक गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि RBI सख्त मॉनिटरी पॉलिसी के रुख पर कायम रहेगा और महंगाई कम करने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही सतर्क रहते हुए हर सूचना और डेटा पर नजर रखेंगे.
डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा, 'जब तक महंगाई लक्ष्य के भीतर नहीं आ जाती, तब तक MPC के रुख को डिसइन्फ्लेशनरी बने रहने की जरूरत होगी.'
वहीं, डिप्टी गवर्नर पात्रा ने कहा कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई वैश्विक परिदृश्य के हिसाब से जटिल है.
MPC की 6 सदस्यीय टीम में RBI के 3 अधिकारी– गवर्नर शक्तिकांता दास, डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा और कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन शामिल हैं और 3 बाहरी सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है.
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