यह ख़बर 01 मार्च, 2013 को प्रकाशित हुई थी

बजट पर चर्चा के समय और कदमों की घोषणा : चिदंबरम

खास बातें

  • वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने संकेत दिया कि अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों के चलते उनके हाथ बंद हुए थे, हालांकि संसद में बजट पारित होने के दौरान और कदमों तथा फैसलों की घोषणा की जाएगी।
नई दिल्ली:

वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने संकेत दिया कि अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों के चलते उनके हाथ बंद हुए थे, हालांकि संसद में बजट पारित होने के दौरान और कदमों तथा फैसलों की घोषणा की जाएगी।

आम बजट पेश करने के बाद औपचारिक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बजट कोई एकबारगी की बात या अकेला कदम नहीं है, यह तो सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, वास्तव में अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियां हैं और ये चुनौतियां कई तरह की हैं। आर्थिक समीक्षा में इन चुनौतियों का जिक्र है। संसद में बजट चर्चा तथा वित्त विधेयक पर जवाब में और फैसलों व कदमों की घोषणा की जाएगी।

धनाढ्यों या सुपर-रिच लोगों पर 10 प्रतिशत अधिभार को उचित ठहराते हुए चिदंबरम ने कहा कि यह कदम तो एक साल के लिए ही उठाया गया है, क्योंकि राजस्व पर दबाव है और हमें राजकोषीय घाटे को 2013-14 में घटाकर 4.8 प्रतिशत पर लाना है। उन्होंने कहा, एक बार कर राजस्व बढ़ने पर एक साल बाद हमें अधिभार की जरूरत नहीं होगी। यह तो पुल की तरह है।

चिदंबरम ने मीडिया द्वारा सुपर-रिच की परिभाषा को केवल एक करोड़ रुपये से अधिक आय वालों से जोड़ने पर आपत्ति जताई और कहा, मैंने सुपर-रिच शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि अधिभार से कर चोरी को बढ़ावा नहीं मिलेगा। वित्तमंत्री ने कहा कि बजट में प्रत्यक्ष करों से 13,300 करोड़ रुपये के लाभ का जो अनुमान लगाया गया है, उसका बड़ा हिस्सा धनाढ्य आयकर दाताओं (एक करोड़ रुपये या उससे अधिक की सालाना आय वालों) पर 10 प्रतिशत अधिभार से आएगा। देश में इस वर्ग के लोगों की संख्या 42,800 है।

उन्होंने कहा कि बजट ने लोगों पर कोई बोझ नहीं डाला है और न ही बाजार तथा निवेशकों के किसी वर्ग को डराया है। चिदंबरम ने कहा, बजट का मुख्य जोर राजकोषीय समझदारी वाला मार्ग अपनाना तथा राजकोषीय घाटे को इस साल 5.2 प्रतिशत तथा अगले साल 4.8 प्रतिशत पर नियंत्रित रखना है।

यूपीए के घटक दलों जैसे कि सपा द्वारा बजट की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि बजट तथा वित्त विधेयक संसद में पारित हो जाएगा। वित्तमंत्री ने कहा कि वह बजट को जनविरोधी तथा किसान विरोधी बताने संबंधी सारी आलोचनाओं का जवाब संसद में देंगे। उन्होंने कहा, पहले भी सरकार के बजट पारित हुए हैं।

चिदंबरम ने कहा कि सरकार आगामी वित्तवर्ष में विनिवेश से 40,000 करोड़ रुपये तथा बाल्को और एचजेडएल जैसी गैर-सरकारी कंपनियों में सरकार की बाकी हिस्सेदारी ब्रिकी से 14,000 करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने मौजूदा चालू खाता घाटे को जटिल मुद्दा बताया, क्योंकि आयात, निर्यात की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि मध्यम और दीर्घकालिक स्तर पर सीएडी पर काबू पाने का एकमात्र रास्ता निर्यात बढ़ाना है, क्योंकि तेल एवं खाद्य के आयात को समाप्त नहीं किया जा सकता।

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चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि वृद्धि, मुद्रास्फीति नियंत्रण तथा निवेश के लिहाज से आगामी वित्तवर्ष मौजूदा 2012-13 की तुलना में बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि 2013-14 में 6.1-6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल किए जाने के बाद 2014-15 में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत से अधिक रहनी चाहिए।