यह ख़बर 03 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

आखिर कौन है गरीब, नहीं हो सका तय...!

खास बातें

  • रोज़ 32 रुपये खर्च करने वाला गरीब है या नहीं... यह अभी तय नहीं हो सका है। गरीबों की गिनती एक बार फिर से जनवरी 2012 में की जाएगी।
नई दिल्ली:

रोज़ 32 रुपये खर्च करने वाला गरीब है या नहीं... यह अभी तय नहीं हो सका है। गरीबों की गिनती एक बार फिर से जनवरी 2012 में सोशियो-इकॉनोमिक कास्ट सेंसस की रिपोर्ट मिलने के बाद की जाएगी। 32 रुपये के आंकड़े पर सफ़ाई देने के लिए सोमवार को मैदान में खुद योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया उतर आए। उन्होंने बताया कि 32 रुपये का फ़ैसला फ़िलहाल सरकार लागू नहीं करेगी। लेकिन, इसके अलावा जो भी सवाल पत्रकारों ने पूछे उनका जवाब तसल्लीबक्श नहीं मिल पाया। सरकार और योजना आयोग गरीबी का पैमाना बदलने के लिए तैयार हो गए हैं। योजना आयोग की एक्सपर्ट कमेटी फिर से गरीबी रेखा की सीमा तय करेगी। लेकिन इसका आधार जाति आधारित गणना होगी। देश में इस वक्त सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंसस यानी सामाजिक-आर्थिक और जाति के आधार पर जनगणना चल रही है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर योजना आयोग गरीबी की नई परिभाषा तय करेगा। योजना आयोग और ग्रामीण विकास मंत्रालय की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें ये ऐलान किया गया। इसके पहले योजना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि शहरी इलाके में हर रोज 32 रुपये और ग्रामीण इलाके में 26 रुपये रोज खर्च करने वालों को ही गरीब माना जाएगा।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com