यह ख़बर 18 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार में गिरावट जारी रहने की आशंका

खास बातें

  • शेयरों में नरमी का दौर अभी जारी रहेगा पर प्रमुख शेयरों के कीमतों में आई भारी गिरावट के मद्देनजर सोमवार को थोड़ा सुधार दिखने की भी उम्मीद है।
New Delhi:

देश के शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव का दौर इस सप्ताह भी जारी रह सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि शेयरों में नरमी का दौर अभी जारी रहेगा, पर प्रमुख शेयरों के कीमतों में पिछले सप्ताह आई भारी गिरावट के मद्देनजर सोमवार को थोड़ा सुधार दिखने की भी उम्मीद है। आईआईएफएल के खुदरा दलाली कारोबार के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत प्रभाकरण ने कहा, इस सप्ताह भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा और रुझान नरमी का होगा। इस दौरान बाजार की दशा और दिशा यूरो क्षेत्र के संकट तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश के रुख जैसे कई कारकों से प्रभावित होगी। पिछले सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव में बंबई शेयर बाजार का प्रमुख 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 722.11 अंक टूट गया। अक्टूबर माह में औद्योगिक उत्पादन के संकुचन की रपट आने के बाद बाजार में निराशा और बढ़ गई थी। अक्टूबर, 2011 में औद्योगिक उत्पादन वार्षिक आधार पर 5.1 प्रतिशत घट गया था। रिजर्व बैंक ने 16 दिसंबर को जारी अपनी ब्याज की अर्ध-तिमाही समीक्षा में अपनी नीतिगत ब्याज दरों - रेपो और रिवर्स रेपो में कोई बदलाव नहीं किया पर इसमें ऋण का प्रवाह बढ़ाने के लिए कोई उपाय न किए जाने से बाजार को निराशा हुई और नीति ऐलान होने के दिन प्रमुख सूचकांक चढ़ने के बाद अंत में तेज गिरावट के साथ बंद हुए। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने संकेत दिया है कि आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट को ध्यान में रख कर आने वाले समय में ब्याज दरों में कमी की जा सकती है, पर उन्होंने इसके समय को लेकर कोई अटकलबाजी करने से साफ इनकार किया। सप्ताह के दौरान रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से रुपये की विनिमय दर काफी हद तक संभल गई। सप्ताह के शुरू में अमेरिकी डॉलर के समक्ष रुपया 54.32 के ऐतिहासिक निम्नतम स्तर तक चला गया था। रिजर्व बैंक द्वारा वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाने से रुपये में तेज सुधार हुआ और शुक्रवार को बंद दर 52.70-71 रुपये प्रति डॉलर रही। लगातार ऊंची मुद्रास्फीति, ब्याज दर में तेजी, रुपये की विनिमय दर में गिरावट, कच्चे तेल के बाजार में उछाल, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय और निर्यात बाजार की अनिश्चितता के कारण भारतीय अर्थव्यवथा की वृद्धि प्रभावित हो रही है। इसका असर इस वर्ष भारतीय शेयर बाजारों पर बहुत प्रतिकूल रहा है। देश के शेयर बाजार का दाबमापी कहा जाने वाला बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स इस साल करीब 25 प्रतिशत घट चुका है। गत सप्ताह आखिरी दिन शुक्रवार के कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 150 अंक चढ़ा था, लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में नकदी बढ़ाने के उपाय न दिखने से बाजार में बिकवाली शुरू हो गई और सेंसेक्स 345.12 अंक टूटकर 15,491.35 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले, सेंसेक्स ने यह स्तर 3 नवंबर, 2009 को देखा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी सप्ताह के आखिरी दिन 92.75 अंक टूटकर 4,651.60 अंक पर बंद हुआ।


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