यह ख़बर 17 मार्च, 2013 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार : रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगी नजर

खास बातें

  • अगले सप्ताह शेयर बाजार में निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा घोषणा पर टिकी रहेगी। रिजर्व बैंक मंगलवार 19 मार्च, 2013 को मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने वाला है।
मुंबई:

अगले सप्ताह शेयर बाजार में निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा घोषणा पर टिकी रहेगी। रिजर्व बैंक मंगलवार 19 मार्च, 2013 को मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने वाला है।

महंगाई दर के ताजा आंकड़ों से हालांकि मुख्य दरों में कटौती की संभावना कम दिख रही है। 14 मार्च, 2013 को जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक फरवरी माह के लिए उपभोक्ता महंगाई दर 6.84 फीसदी रही, जो जनवरी 2013 में 6.62 फीसदी थी। सरकार ने दिसंबर 2012 माह के लिए उपभोक्ता महंगाई दर को भी ऊपर की ओर संशोधित कर 7.18 फीसदी से 7.31 फीसदी कर दिया। मौजूदा कारोबारी साल में फरवरी तक की महंगाई दर 5.71 फीसदी रही, जो पिछले वर्ष 6.56 फीसदी थी।

प्रमुख उद्योगों में महंगाई दर फरवरी 2013 में तीन सालों में सबसे कम 3.8 फीसदी रही, जो जनवरी 2013 में 4.1 फीसदी थी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने गत बुधवार को कहा था कि छह फीसदी से अधिक महंगाई दर मौद्रिक नीति को सख्त करने का संकेत देती है। सुब्बाराव ने लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में कहा था कि रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी है कि महंगाई दर को सुविधाजनक स्तर पर बरकरार रखा जाए। उनके मुताबिक भारत के लिए सुविधाजनक स्तर चार फीसदी से छह फीसदी है।

मौद्रिक नीति के अलावा निवेशकों की नजर संसद में चालू बजट सत्र पर भी है। सरकार कई विधेयक संसद में पेश करने वाली है। इनमें शामिल हैं फॉरवार्ड कांट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक 2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक 2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापना विधेयक 2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2008।

इसके अलावा आने वाले दिनों में शेयरों की कीमत में अधिक वृद्धि की काफी सीमित संभावना है, क्योंकि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निर्देश के मुताबिक निजी और सरकारी कंपनियों में प्रमोटरों को अपनी हिस्सेदारी घटाकर अधिकतम निश्चित सीमा तक लानी है। इसके लिए कंपनियां आम आदमी के लिए बड़े पैमाने पर शेयर उपलब्ध कराएगी, जिससे बाजार में शेयरों की बाढ़ आ जाएगी।

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सरकार ने आगामी कारोबारी साल में सरकारी कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी घटाकर 40 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है जबकि निजी कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भी बाजार में शेयरों की बड़े पैमाने पर आपूर्ति होने वाली है।