यह ख़बर 22 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

गरीबी रेखा तय करने की नई प्रणाली विकसित करेंगे : मनमोहन

खास बातें

  • प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार कहा कि देश में गरीबों की संख्या का पता लगाने की एक नई प्रणाली विकसित करने के वास्ते एक नया समूह गठित किया गया है।
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार कहा कि देश में गरीबों की संख्या का पता लगाने की एक नई प्रणाली विकसित करने के वास्ते एक नया समूह गठित किया गया है।

योजना आयोग की पिछले दिनों जारी रिपोर्ट में शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 28.65 रुपये खर्च की गरीबी रेखा तय की गई थी। इसमें कहा गया कि शहरों में 28.65 रुपये दैनिक खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। आयोग की इस रिपोर्ट की तीखी आलोचना हुई है।

सिंह ने गरीबी का आकलन करने के लिये बहुस्तरीय जानकारी जुटाने की वकालत करते हुए कहा कि देश में सामाजिक आर्थिक और जातिगत-आर्थिक जनगणना की जा रही है इससे नए आंकड़े सामने आएंगे।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को इस वर्ष पद्म पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर अलग से बातचीत में संवाददाताओं से कहा, ‘गरीबी का आकलन करने के लिए हमें बहुस्तरीय प्रयास करने होंगे। गरीबी आकलन का नया तरीका निकालने को हमने एक नया समूह बनाया है।’ योजना आयोग के आकलन के अनुसार, 2009-10 में गरीबों का अनुपात 29.8 प्रतिशत था। वर्ष 2004-05 में यह 37.2 फीसद था। यह आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में 28.65 रुपये प्रति व्यक्ति के खर्च और ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन 22.42 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च के आधार पर सामने आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तेंदुलकर समिति की रपट अपने आप में सर्वसमावेशी नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले गरीबी का आकलन दैनिक कैलोरी खपत के आधार पर किया जाता रहा है। यह तरीका लगभग 30 साल तक चला। तेंदुलकर समिति के तरीके के तहत गरीबी की रेखा स्वास्थ्य और शिक्षा पर होने वाले खर्च तथा प्रतिदिन कैलोरी खपत के आधार पर की गई है।

गरीबी रेखा के ताजा अनुमानों से नाराजगी बढ़ी है और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया को हटाने की मांग उठने लगी है। इस बीच आयोग ने आज एक विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की है जो गरीबी के आकलन का नया तरीका निकालेगा।

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योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार ने यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार गरीबी रेखा के नये आंकड़ों को छोड़ रही है, कहा, ‘मेरा मानना है कि गरीबी के आकलन के तरीके पर नए सिरे से विचार किया जाना चाहिए।’ कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘सरकार ने इस तरीके पर नए सिरे से विचार के लिए तकनीकी समूह बनाने का फैसला किया है।’