खास बातें
- दुनियाभर के 80 देशों के 950 शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों में सरकार की आर्थिक नीति को लेकर गुस्सा है।
वाशिंगटन: दुनियाभर के 80 देशों के 950 शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों में सरकार की आर्थिक नीति को लेकर गुस्सा है। यूरोप के कुछ देश दीवालिया होने की कगार पर हैं जिनकी हालत की वजह कर्ज है। लोग इस बात से परेशान हैं कि बड़ी कंपनियों को और बैंकों को बचाने के लिए सरकार पैकेज का ऐलान कर रही है जिस वजह से आम लोगों के लिए सरकारी फायदे कम हो रहे हैं। अमेरिका में भी लोग मानते हैं कि मंदी की अहम वजह बड़े बैंक हैं। दुनिया में कई सरकारों पर उद्योगपतियों पर नरम और आम आदमी की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई बड़े देशों में प्रदर्शन हो रहा है। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मध्यवर्ग की भागीदारी है। ग्लोबल प्रोटेस्ट के दौरान रोम में दंगे भड़क गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने बड़ी संख्या में गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया है। वहीं कई जगह लूटपाट की भी खबर है। रोम के मेयर के मुताबिक अब तक करीब 7 करोड़ रुपये की संपत्ति को दंगाइयों ने नुकसान पहुंचाया है। दंगाइयों ने बैंकों में जमकर तोड़फोड़ की है। इटली की समाचार एजेंसी के मुताबिक इन दंगों में 135 लोग घायल हो गए हैं जिसमें 105 पुलिसवाले शामिल हैं। घायलों का इलाज अस्पताल में किया जा रहा है वहीं 20 से ज्यादा लोगों को दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। न्यूयॉर्क सिटी में टाइम स्कॉवायर पर एक बड़ी रैली निकाली गई। आर्थिक रूप से भेदभाव का आरोप लगाते हुए लोग सड़कों पर निकल आए हैं। प्रदर्शनकारी जे पी मोरगन चेस एंड कंपनी की ब्रांच में भी पहुंचे और लोगों से अपील की वो यहां से अपना एकाउंट बंद कर लें। पुलिस ने करीब 70 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। वहीं दो पुलिसवालों को प्रदर्शनकारियों से निपटने के दौरान चोट भी लगी है। वहीं नोबल पुरस्कार विजेता जोसेफ की स्टडी में ये बात सामने आई है कि अमेरिका की 40 फीसदी पैसे पर 1 फीसदी लोगों का कब्जा है। जर्मनी में करीब 40 हजार लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है। फ्रैंकफर्ट में करीब 200 लोगों ने अपना डेरा यूरोपियन सेंट्रल बैंक के सामने बना लिया है। ये लोग यहीं रह रहे हैं। इन्होंने अपना टैंट लगा लिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वो यहां अनिश्चितकाल के लिए रहने आए हैं। वहीं बर्लिन में 10 हजार प्रदर्शनकारियों को पार्लियामेंट तक मार्च करने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसवाले जमा हो गए। जर्मनी में प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो सरकार के लिए चिंता की बात है।