यह ख़बर 19 दिसंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

'ज्यादातर कामकाजी महिलाएं अंधेरा होने के बाद असुरक्षित महसूस करती हैं'

खास बातें

  • उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि देश में लगभग सभी आर्थिक क्षेत्रों में ज्यादातर कामकाजी महिलाएं अंधेरा होने के बाद विशेष रूप से रात्रि पाली में काम के दौरान खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
नई दिल्ली:

उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि देश में लगभग सभी आर्थिक क्षेत्रों में ज्यादातर कामकाजी महिलाएं अंधेरा होने के बाद विशेष रूप से रात्रि पाली में काम के दौरान खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।

एसोचैम के सर्वेक्षण के अनुसार, ज्यादातर ऐसी महिलाएं बीपीओ-आईटीईएस, आतिथ्य, नागर विमानन तथा नर्सिंग होम में कार्यरत हैं।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि करीब 92 फीसदी कामकाजी महिलाएं विशेष रूप से रात्रि पाली में काम के दौरान असुरक्षित महसूस करती हैं। खासकर बीपीओ-आईटीईएस, आतिथ्य, नागर विमानन और नर्सिंग होम में काम करने वाली महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं।

उद्योग मंडल ने छोटी और बड़ी कंपनियों में कार्यरत करीब 5,000 महिलाओं को सर्वेक्षण में शामिल किया। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, कोलकाता, पुणे और हैदराबाद आदि में किया गया।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन, बसों और सड़क पर महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरे का सामना करना पड़ता है।