खास बातें
- सरकारी तेल कंपनियों को नियंत्रित दर पर डीजल, एलपीजी और केरोसिन की बिक्री के कारण 1,21,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
New Delhi: सरकारी तेल कंपनियों को नियंत्रित दर पर डीजल, घरेलू एलपीजी और केरोसिन की बिक्री के कारण चालू वित्तवर्ष के दौरान 1,21,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। यह बात पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने कही। सीमाशुल्क और उत्पाद शुल्क में कटौती के अलावा डीजल की कीमत तीन रुपये, केरोसिन दो रुपये प्रति लीटर और एलपीजी की कीमत 50 रुपये प्रति सिलिंडर बढ़ाने के बावजूद तेल कंपनियों को यह घाटा हो सकता है। तकनीकी भाषा में यह तेल कंपनियों की कम वसूली यानी अंडर-रिकवरी है। रेड्डी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस संबंधी संसदीय परामर्श समिति की बैठक में कहा, इन पहलों के बावजूद तेल विपणन कंपनियों को फिलहाल 235 करोड़ रुपये प्रति दिन के आधार पर नुकसान उठाना पड़ रहा है और आशंका है कि 2011-12 में 1,21,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। कीमतों में बढ़ोतरी और सीमाशुल्क को पांच फीसदी से घटाकर शून्य पर लाने और डीजल पर उत्पाद शुल्क 2.60 रुपये प्रति लीटर घटाने से पहले सरकरी तेल कंपनियों को चालू वित्तवर्ष में 1,71,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका थी। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को फिलहाल डीजल पर 4.97 रुपये प्रति लीटर, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बेचे जाने वाले केरोसिन पर 23.74 रुपये प्रति लीटर और घरेलू गैस पर 247 रुपये प्रति सिलिंडर का नुकसान हो रहा है।