यह ख़बर 17 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'लूप टेलिकॉम पर सच्चाई से मंत्रालयों ने फेरी नजरें'

खास बातें

  • जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 2008 में 2जी लाइसेंस हासिल करने वाली लूप टेलीकाम एस्सार समूह की मुखौटा कंपनी है।
नई दिल्ली:

सीबीआई ने अपने तीसरे आरोपपत्र में इस बात का खुलासा किया है कि जटिल कंपनी ढांचे की आड़ में वास्तव में लूप टेलीकॉम लि. एस्सार समूह की ही कंपनी है और कंपनी कार्य मंत्रालय तथा दूरसंचार विभाग ने भी इसकी जांच की जरूरत नहीं समझी और उसे रहने दिया। आरोपी कंपनी लूप टेलीकाम के खिलाफ लगे आरोप की जांच के संबंध में दूरसंचार विभाग की अर्जी पर कंपनी मंत्रालय की अस्पष्ट रिपोर्ट का 105 पृष्ठ के आरोपपत्र में जिक्र किया गया है। आरोपपत्र विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी की अदालत के सुपुर्द किया गया है। अदालत 21 दिसंबर को इसका संज्ञान लेगी। आरोपपत्र में कहा गया है कि कंपनी मंत्रालय (एमसीए) उप निदेशक (जांच) की यूनिफाइड एक्ससेस सर्विसेज लाइसेंस (यूएएसएल) दिशानिर्देश के उपबंध आठ के उल्लंघन की रिपोर्ट के बावजूद मंत्रालय ने एस्सार समूह के लूप टेलिकॉम पर नियंत्रण के बारे में दूरसंचार विभाग को अस्पष्ट रिपोर्ट भेजी। अपने आरोपपत्र में जांच एजेंसी ने एस्सार समूह के प्रवर्तक अंशुमन तथा रवि रुइया, लूप टेलीकाम की प्रवर्तक किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान तथा एस्सार समूह के निदेशक (रणनीति तथा योजना) विकास सर्राफ पर भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है। आरोपपत्र में सीबीआई ने एस्सार समूह के के समूह अध्यक्ष (मानव संसाधन) आदिल मालिया, समेत 100 लोगों को गवाह बनाया है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने 398 दस्तावेज भी पेश किए हैं जिसमें आरोप लगाया है कि 2008 में 2जी लाइसेंस हासिल करने वाली लूप टेलीकाम एस्सार समूह की मुखौटा कंपनी है।


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