यह ख़बर 19 मार्च, 2013 को प्रकाशित हुई थी

RBI ने की रेपो रेट में कटौती, फिर भी लोन नहीं होंगे सस्ते

खास बातें

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में सिर्फ 25 आधार अंकों की कटौती की और कहा कि इससे अधिक की गुंजाइश नहीं है। लिहाजा वाहन, आवास और वाणिज्यिक ऋणों पर ब्याज दरें अपरिवर्तित रह सकती हैं।
नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में सिर्फ 25 आधार अंकों की कटौती की और कहा कि इससे अधिक की गुंजाइश नहीं है। लिहाजा वाहन, आवास और वाणिज्यिक ऋणों पर ब्याज दरें अपरिवर्तित रह सकती हैं। बैंक ने नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कोई परिवर्तन नहीं किया।

यह निर्णय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मौजूदा वित्त वर्ष की मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा के दौरान लिया।

रेपो दर, जिस पर वाणिज्यिक बैंक सीमित अवधि के लिए रिजर्व बैंक से ऋण लेते हैं, 7.75 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दी गई। इसके कारण रिवर्स रेपो दर, जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों से सीमित अवधि के लिए उधारी लेता है, 6.75 प्रतिशत से घटकर स्वत: 6.5 प्रतिशत हो गई।

---------------------------------------------------------------------------
जानिए, क्या हैं रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर...

---------------------------------------------------------------------------

रिजर्व बैंक ने हालांकि नकद आरक्षी अनुपात, जो वाणिज्यिक बैंक अपनी नकद जमा के एक हिस्से के रूप में रिजर्व बैंक के पास नकदी के रूप में रखते हैं, में कोई परिवर्तन नहीं किया है। यह अब भी चार प्रतिशत है।

विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि ब्याज दरों में मामूली कटौती की गई है और साथ ही चेतावनी दी गई है कि इससे अधिक की गुंजाइश नहीं है, लिहाजा वाणिज्यिक बैंकों द्वारा वाहन, आवास और वाणिज्यिक ऋण पर ब्याज दरें घटाए जाने की सम्भावना कम ही है।

रिजर्व बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "जनवरी 2013 में रिजर्व बैंक की तीसरी तिमाही की समीक्षा के बाद वैश्विक वित्त बाजार की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आई है।"

बयान में कहा गया है, "घरेलू मोर्चे पर भी विकास दर में गिरावट आई है, हालांकि महंगाई उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिसे सतत आर्थिक विकास के लिए अनुकूल नहीं कहा जा सकता।"

बयान में कहा गया, "भले ही मौद्रिक नीति समीक्षा में विकास के जोखिमों पर ध्यान दिया गया है, फिर भी नीति में और नरमी की गुंजाइश सीमित है।"

कारोबारी जगत ने दरों में इस कटौती पर अधिक उत्साह नहीं दिखाया। एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने कहा कि और अधिक कटौती की सीमित गुंजाइश बताए जाने के कारण निवेशकों को निराशा हुई है।

एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार एन. धूत ने कहा, "एक तरीके से आरबीआई हमें यह कह रहा है कि हमें उच्च ब्याज दर के साथ जीना सीख लेना चाहिए, भले ही आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने खुद आर्थिक सुस्ती पर चिंता जताई है।"

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

यह इस कैलेन्डर वर्ष में रेपो रेट में की गई दूसरी कटौती है। आरबीआई ने 29 जनवरी को भी रेपो रेट में चौथाई फीसदी, यानि 25 आधार अंकों की कटौती कर उसे 7.75 फीसदी कर दिया था। उस वक्त सीआरआर में भी 25 आधार अंकों की कटौती कर उसे चार फीसदी किया गया था। इससे पहले आरबीआई ने अप्रैल, 2012 में रेपो और रिवर्स रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की थी।