यह ख़बर 06 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

कड़ी मौद्रिक नीति पर पुनर्विचार चाहते हैं उद्यमी

खास बातें

  • भारतीय उद्योग जगत के दिग्गजों ने कहा कि ऋण की ऊंची लागत का नकारात्मक असर वृद्धि दर पर पड़ रहा है।
मुंबई:

भारतीय उद्योग जगत के दिग्गजों ने भारतीय रिजर्व बैंक की ऊंची ब्याज दर नीति पर पुनर्विचार किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि ऋण की ऊंची लागत का नकारात्मक असर वृद्धि दर पर पड़ रहा है। एचएसबीसी की प्रमुख नैना लाल किदवई ने हाल ही के एक अध्ययन के हवाले से कहा कि अधिकांश कंपनियों का मानना है कि मुद्रास्फीति तथा नीतिगत दरों में कई बार की बढ़ोतरी का असर उद्योग जगत के प्रदर्शन पर पड़ने लगा है। उन्होंने कहा, 'उद्योग जगत बढ़ती मुद्रास्फीति तथा ब्याज दरों के अपने परिचालन पर असर के बारे में चिंतित है। रिजर्व बैंक द्वारा दरों में और बढ़ोतरी का नकारात्मक असर निवेश योजनाओं पर हो सकता है।' रिजर्व बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने तीन मई को प्रस्तावित सालाना मौद्रिक नीति घोषणा से पहले परंपरागत बैठक की। रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए बीते 13 माह में नीतिगत दरों में आठ बार बढोतरी की है। एसोचैम के अध्यक्ष दिलीप मोदी ने कहा कि रिजर्व बैंक को 'मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान कड़ी मौद्रिक नीति बहाल करने की आवश्यकता की समीक्षा करनी चाहिए।' ताकि कारपोरेट जगत को ऋण प्रवाह बढ़े तथा औद्योगिक निष्पादन सुधरे। प्रमुख रीटेलर निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि दरों में बढ़ोतरी का विशेषकर पहली बार घर खरीदने वालों पर नकारात्मक असर हुआ है। बैठक में एलएंडटी के वाईएम देवस्थली, टाटा स्टील के बी मुतुरमन तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा के भारत दोशी भी थे।


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