यह ख़बर 10 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

दक्षिण एशिया में व्यापार, यात्रा के उदारीकरण की जरूरत

खास बातें

  • दो दिवसीय दक्षिण एशिया सम्मेलन में शनिवार को कई सिफारिशें सामने आईं, इसमें तेजी से क्षेत्रीय एकीकरण के लिए व्यापार और यात्रा में उदारीकरण किया जाना भी शामिल है।
नई दिल्ली:

दो दिवसीय दक्षिण एशिया सम्मेलन में शनिवार को कई सिफारिशें सामने आईं, इसमें तेजी से क्षेत्रीय एकीकरण के लिए व्यापार और यात्रा में उदारीकरण किया जाना भी शामिल है। साथ ही केंद्र सरकार ने कहा कि सबके हित के लिए वह इस बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।

सप्रू हाउस में 'दक्षिण एशिया में बदलाव : पहल की जरूरत' विषय पर आयोजित सम्मेलन में दक्षेस देशों और म्यांमार के 30 से अधिक विद्वान, विशेषज्ञ और पूर्व राजनयिक शामिल हुए।

नौ देशों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में सक्रिय, परस्पर निर्भर और समृद्ध क्षेत्र के लिए कई विचार रखे।

सम्मेलन की शुरुआत देश के सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के भाषण से और समापन विदेश राज्य मंत्री ई. अहमद के भाषण से हुआ। सम्मेलन का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) और एसोसिएशन ऑफ एशियन स्कॉलर्स ने मिलकर किया।

अहमद ने दक्षिण एशिया पर दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर कहा कि पड़ोसी देशों के प्रति भारत का नजरिया शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध पड़ोस के विचार पर आधारित है।

अहमद ने कहा, "हमारा मानना है कि सक्रिय क्षेत्रीय सहयोग सभी के लिए बेहतर है।" उन्होंने कहा कि भारत सरकार दक्षिण एशिया में सहयोग बढ़ाने के लिए जो भी सम्भव होगा, करेगी। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को क्षेत्रीय एकीकरण में बड़ी भूमिका निभानी होगी।

दक्षेस देशों के बीच आपसी व्यापार पिछले पांच सालों में दो गुणा हो गया है लेकिन यह अभी भी क्षेत्र के कुल व्यापार का सिर्फ छह फीसदी है।

आईसीडब्ल्यूए के महानिदेशक सुधीर टी. देवारे ने कहा, "दक्षिण एशिया में इस बदलाव के लिए सोच में बड़े बदलाव की जरूरत है। यह विचारों पर अमल करने और किए जाने वाले कार्यो पर ध्यान देने का समय है।"

सम्मेलन में पाकिस्तान से भी करीब आधे दर्जन प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें पूर्व वित्त और विदेश मंत्री सरताज अजीज भी थे। उन्होंने लोगों के सम्पर्क और मुक्त आवागमन बढ़ाने पर बल दिया।

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दो दिवसीय सम्मेलन में क्षेत्रीय एकीकरण के कार्यक्रमों का प्रारूप तैयार किया गया। सम्मेलन की सिफारिशें इस साल के आखिर में दक्षेस मंत्रीय स्तरीय सम्मेलन में विचार के लिए रखी जाएंगी।