यह ख़बर 19 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

अब ब्याज दरों में कटौती करने की जरूरत : बसु

खास बातें

  • बसु ने कहा, अब ब्याज दरों में कटौती जैसे अलग कदम उठाने होंगे। जब महंगाई की दर ऊंची हो तो RBI का सीधा तरीका होता है कि ब्याज दरें बढ़ा दी जाएं।
नई दिल्ली:

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार को कायम रखने के लिए अब ब्याज दरों में कमी किए जाने की जरूरत पर बल दिया है। उनका मानना है कि महंगाई पर अंकुश के लिए ब्याज दर बढ़ाने की भारतीय रिजर्व बैंक की नीति का असर सीमित रहा है और अब कुछ और नुस्खे अपनाने का समय आ गया है। बसु ने कहा, मुझे लगता है कि अब ब्याज दरों में कटौती जैसे कुछ अलग कदम उठाने होंगे। जब महंगाई की दर ऊंची हो तो केंद्रीय बैंक का सीधा तरीका होता है कि ब्याज दरें बढ़ा दी जाएं। मेरा विचार है कि अब हम यह उपाय पूरी तरह आजमा चुके हैं। इसका कुछ असर जरूर पड़ा है, पर उतना नहीं जितनी कि उम्मीद थी। ऐसे में उन्होंने सलाह दी कि अब कुछ और करना चाहिए। इस बारे में उन्होंने तुर्की का उदाहरण दिया जिसने महंगाई की समस्या को ब्याज दरें घटाकर हल किया था। उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने गत शुक्रवार को अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की और वृद्धि की है। पिछले 18 माह में महंगाई पर अंकुश के लिए रिजर्व बैंक 12 बार ब्याज दरें बढ़ा चुका है। बसु ने कहा, हम एक नई दुनिया में रह रहे हैं। कई देश इस समस्या का सामना कर रहे हैं। हमें अलग नीति का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि हम देश की वृद्धि की कहानी को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यह पूछे जाने पर कि महंगाई की दर कब तक 5 से 6 प्रतिशत पर आएगी, बसु ने कहा, दुर्भाग्य से 2012 के मध्य से पहले नहीं। अगस्त माह में कुल मुद्रास्फीति बढ़कर 9.78 प्रतिशत पर पहुंच गई है। देश की आर्थिक वृद्धि दर के बारे में पूछे जाने पर मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, यदि यूरो क्षेत्र का संकट मंदी में नहीं बदलता है, तो आर्थिक वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत रहेगी। बसु ने उम्मीद जताई कि प्रत्यक्ष कर संहिता :डीटीसी: एक अप्रैल, 2012 से लागू हो जाएगी।


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