यह ख़बर 05 नवंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

देश में अंशकालिक नौकरी में वृद्धि : विश्व बैंक

खास बातें

  • विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अंशकालिक काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 में जहां संगठित क्षेत्र में अनियमित कर्मियों का अनुपात 32 फीसदी था, वहीं 2010 में यह बढ़कर 68 फीसदी हो गया है।
नई दिल्ली:

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अंशकालिक काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 में जहां संगठित क्षेत्र में अनियमित कर्मियों का अनुपात 32 फीसदी था, वहीं 2010 में यह बढ़कर 68 फीसदी हो गया है।

'विश्व बैंक विकास रिपोर्ट 2013 : नौकरी' के मुताबिक भारत तथा अन्य विकासशील देशों में अंशकालिक और अस्थायी नौकरी करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक अस्थायी नौकरी करने वालों की संख्या 2009 में 10 फीसदी और 2010 में 18 फीसदी बढ़ी। रिपोर्ट में कहा गया, "सबसे असामान्य बात संगठित क्षेत्र में अनियमित कामगारों की संख्या में वृद्धि है, जो 2000 में 32 फीसदी से बढ़कर 2010 में 68 फीसदी हो गई।"

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विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष कौशिक बसु ने रिपोर्ट में कहा, "कामगार जब कम से अधिक उत्पादकता वाली नौकरी में जाते हैं, तो उत्पादन बढ़ता है और अर्थव्यवस्था अधिक समर्थ होती है। गलघोंटू नियम जो कामगारों में ऐसे विस्थापन को रोकते हैं, उनका ध्यान सामथ्र्य पर नहीं होता है और वे आर्थिक समर्थता का प्रभावित करते हैं।"