खास बातें
- बाजार नियामक सेबी ने पिछले कुछ वर्षों में आए कंपनियों के आईपीओ में फर्जी आवेदन की संभावनाओं की जांच शुरू की है।
नई दिल्ली: बाजार नियामक सेबी ने पिछले कुछ वर्षों में आए कंपनियों के प्रथम सार्वजनिक शेयर निर्गमों (आईपीओ) में फर्जी आवेदन की संभावनाओं की जांच शुरू की है। नियामक ने वासवानी इंडस्ट्री का मामला प्रकाश में आने के बाद अन्य निर्गमों की पड़ताल का निर्णय किया है। वासवानी के आईपीओ में आवेन का स्तर बढ़ाने के लिये फर्जी आवेदन भवाए जाने का संदेह है। सेबी ने आईपीओ के आवेदनों में अनियमितता के संदेह पर इस महीने की शुरुआत में वासवानी इंडस्ट्रीज की सूचीबद्धता पर रोक लगा दी तथा पिछले सप्ताह मामले की जांच के आदेश दिए। जांच अगले छह महीने में पूरी होगी। सूत्रों के अनुसार सेबी को पिछले दो-तीन साल में आए आईपीओ के बारे में शिकायतें मिली हैं जिसमें कहा गया है कि प्रवर्तकों ने फर्जी बोली के जरिये निर्गम के अधिक अभिदान दिखाने के लिए कुछ ऑपरेटरों के साथ साठ-गांठ किया। बाद में उन्होंने इसे वापस ले लिया या शेयर सूचीबद्ध होने के पहले दिन ही टूट गया। कथित अनियमिता से चिंतित सेबी ने आईपीओ से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच का निर्णय किया है और जल्दी ही शेयर बाजारों, मर्चेन्ट बैंकरों तथा अन्य इकाइयों से संबंधित आंकड़े तथा सूचना मांगेगा। सूत्रों ने कहा कि जांच में वैसे आईपीओ पर विशेष तौर पर गौर किया जाएगा जहां बोली पेशकश खुली रहने के दौरान वापस ले ली गई हो या फिर सूचीबद्धता के पहले दिन शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई।