खास बातें
- कर राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के तहत सरकार ऐसी भारतीय कंपनियां के लिए नियमों को कड़ा करने पर विचार कर रही है, जिनकी विदेशों में इकाइयां हैं।
New Delhi: कर राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों के तहत सरकार ऐसी भारतीय कंपनियां के लिए कराधान नियमों को कड़ा करने पर विचार कर रही है, जिनकी विदेशों में सहायक इकाइयां हैं। एक सूत्र ने कहा, घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीतिक दबाव की वजह से कर संग्रहण में इजाफे की बहुत गुंजाइश नहीं है। ऐसे में वित्तमंत्रालय कर राजस्व बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कराधान के मोर्चे पर कुछ कर सकता है। सूत्रों ने कहा कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी 28 फरवरी को सालाना बजट में इस प्रस्ताव की घोषणा कर सकते हैं। सरकार भारतीय कंपनियों और निजी लोगों के लिए विदेशी इकाइयों में निवेश या हिस्सेदारी के बारे में सूचना देने के नियमों को और कड़ा कर सकती है। बताया जाता है कि महंगाई की वजह से सरकार आम लोगों पर कर का बोझ बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। इसी तरह, ऊंची उत्पादन लागत की वजह से कंपनी कर में भी इजाफा होने की संभावना नहीं है। पूरे कर ढांचे में बदलाव अप्रैल, 2012 से प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के रूप में लागू होने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि डीटीसी के अंतरराष्ट्रीय कराधान से संबंधित कुछ प्रस्तावों को पहले ही लागू किया जा सकता है।