यह ख़बर 15 मई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

भारतीय उद्योगों पर है मुद्रास्फीति का दबाव : सर्वेक्षण

खास बातें

  • बढ़ती मुद्रास्फीति से मजदूरी एवं कच्चे माल की दरें बढ़ रही हैं और लागत वृद्धि के रूप में इसका असर भारतीय उद्योगों पर पड़ रहा है।
Mumbai:

बढ़ती मुद्रास्फीति से मजदूरी एवं कच्चे माल की दरें बढ़ रही हैं और लागत वृद्धि के रूप में इसका असर भारतीय उद्योगों पर पड़ रहा है। एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके अनुसार भारत में 10 में से लगभग 7 कंपनियां मजदूरी खर्च बढ़ने की बात करती हैं, जबकि 64 प्रतिशत उद्योग धंधों को बढ़ते लाजिस्टिक खर्च का सामना करना पड़ रहा है। यह सर्वेक्षण कार्यस्थल समाधान उपलब्ध कराने वाली रेगस ने किया है। इसमें कच्चे माल की बढ़ती लागत (54 प्रतिशत) को भी प्रमुखता से उठाया गया है। कुल मुद्रास्फीति मार्च माह में बढ़कर 8.82 प्रतिशत थी। इस सर्वेक्षण के तहत देशभर के 600 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा गया था कि मुद्रास्फीति दबाव उनके व्यापार परिचालन को कैसे प्रभावित कर रहा है। मुद्रास्फीति के जो तीन सबसे बड़े असर सामने आए, उनमें श्रम, लाजिस्टिक तथ कच्चे माल की बढ़ती लागत है। रेगस के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मधुसूदन ठाकुर ने कहा, हमारा अनुसंधान इसकी पुष्टि करता है कि भारत में अधिकांश कंपनियां बढ़ती मुद्रास्फीति का असर अपने व्यापार पर महसूस कर रही हैं।


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