खास बातें
- सरकार द्वारा अचानक ही जोरदार तरीके से आर्थिक सुधारों को बढ़ाने की पहल के बाद अब उद्योग जगत की उम्मीदें भारतीय रिजर्व बैंक की सोमवार को पेश होने वाली मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा पर टिकीं हैं।
मुंबई: सरकार द्वारा अचानक ही जोरदार तरीके से आर्थिक सुधारों को बढ़ाने की पहल के बाद अब उद्योग जगत की उम्मीदें भारतीय रिजर्व बैंक की सोमवार को पेश होने वाली मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा पर टिकीं हैं। उद्योग जगत को इसमें ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है।
एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत ने एक बयान में कहा कि अब समय आ गया है जबकि रिजर्व बैंक को महंगाई को लेकर लगी धुन से कुछ दूरी बनानी चाहिए। साथ ही उसे तेजी से घटती औद्योगिक वृद्धि के आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए।
उद्योग चैंबर ने कहा कि सारा दोष सरकार पर डालते हुए यह कहना सही नहीं होगा कि भारी भरकम राजकोषीय घाटे और बढ़ते चालू खाते की घाटे की वजह से केंद्रीय बैंक के पास और ‘औजार’ नहीं बचे हैं।
सरकार ने बीते सप्ताह तेजी से फैसले लेते हुए बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के निर्णय को अमल में लाने की घोषणा की। इसके अलावा विदेशी एयरलाइंस को घरेलू विमानन कंपनियों में हिस्सेदारी लेने तथा चार सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश का भी फैसला किया गया।
इससे पहले डीजल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए और साथ ही प्रति परिवार सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की सीमा छह सिलेंडर सालाना तय कर दी गई।
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा कि रेपो दरों में तो कटौती की उम्मीद नहीं है, लेकिन केंद्रीय बैंक नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में एक प्रतिशत की कमी कर सकता है। यूनियन बैंक के प्रमुख डी सरकार तथा ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के मुखिया एसएल बंसल को रेपो दरों में चौथाई फीसद कटौती की उम्मीद है।