खास बातें
- भारत वैश्विक संपत्ति में योगदान करने वाल छठा सबसे बड़ा देश बन गया है। यह बात क्रेडिट सुईस नाम की संस्था की वैश्विक संपत्ति रपट में कही गई है।
नई दिल्ली: भारत में गरीबों की तादाद भले ही सबसे अधिक हो लेकिन भारतीयों की औसत संपत्ति पिछले 10 साल में लगभग तिगुनी हो कर 5,500 डॉलर (करीब 2.70 लाख रुपये) तक पहुंच गई है। इसी के चलते भारत वैश्विक संपत्ति में योगदान करने वाल छठा सबसे बड़ा देश बन गया है। यह बात निवेश बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख संस्था क्रेडिट सुईस की वैश्विक संपत्ति रपट में कही गई। हालांकि भारतीयों की औसत संपत्ति 51,000 डॉलर के वैश्विक औसत से बहुत कम और स्विट्जरलैंड के प्रति व्यक्ति 5,40,010 डॉलर की एक फीसद के बराबर है। भारत में साल 2000 में प्रति व्यक्ति संपत्ति 2,000 डॉलर थी जो फिलहाल बढ़कर 5,500 डॉलर हो गई लेकिन संपत्ति वितरण अभी भी बहुत बेतरतीब है और यहां गरीबी बहुत अधिक है। क्रेडिट सुईस ने अपनी रपट में कहा भातर में संपत्ति बढ़ रही है और मध्य वर्ग व संपन्न लोगों की तादाद बढ़ रही है हालांकि हर किसी की इस वृद्धि में हिस्सेदारी नहीं है और अभी भी बहुत अधिक गरीबी है। रपट के मुताबिक भारत में 43 फीसद वयस्कों की संपत्ति 1,000 डॉलर से कम है जबकि विश्व में औसत 27 फीसद लोगों की सम्पत्ति 1,000 डॉलर से नीचे है। भारतीय जनसंख्या का बहुत छोटा वर्ग :0.4 फीसद: ही है जिसकी निवल परिसंपत्ति 1,00,000 डॉलर से उपर है। भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के योगदान के कारण वैश्विक संपत्ति जनवरी 2010 से 14 फीसद बढ़कर जून 2011 में 231,000 अबर डॉलर हो गई।