खास बातें
- प्राइसवाटरहाउस कूपर्स की पूंजी बाजार 2025 में शीर्षक वाली रपट में वैश्विक स्तर की 400 कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधकों के विचारों को शामिल किया गया है।
नई दिल्ली: इक्विटी पूंजी का बाजार पूर्व की ओर अग्रसर है और अगले 15 साल में भारत विदेशी कंपनियों के लिए शेयर सूचीबद्ध करने के लिहाज से सबसे आकर्षक गंतव्यों में शामिल होगा। प्राइसवाटरहाउस कूपर्स की पूंजी बाजार 2025 में शीर्षक वाली रपट में वैश्विक स्तर की 400 कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधकों के विचारों को शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि तेजी से अग्रसर एशिया भविष्य में सूचीबद्धता के लिए आकषर्क गंतव्य के रूप में उभरा है। सर्वेक्षण में शामिल करीब 80 फीसद अधिकारियों का कहना था कि 2025 तक चीन नए इश्युओं के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य होगा। भारत इस मामले में दूसरे स्थान पर होगा। करीब 59 फीसद लोगों ने कहा कि भारत सूचीबद्धता के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य होगा। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इश्यू पूंजी के लिहाज से भारत तीसरे स्थान पर होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हांगकांग स्टाक एक्सचेंज में विदेशी कंपनियों ने चीन के उपक्रमों को पीछे छोड़ दिया है। विदेशी कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 122.5 अरब डॉलर जुटाए हैं, जो हांगकांग में सार्वजनिक निर्गम के जरिये जुटाई गई राशि का 70 फीसद है। इसी तरह सिंगापुर एक्सचेंज के साथ भी यही स्थिति है। सिंगापुर एक्सचेंज में सूचीबद्ध 40 फीसद कंपनियां सिंगापुर से बाहर की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का प्राथमिक बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। 2010 में 63 आईपीओ के जरिये 8.3 अरब डॉलर जुटाए गए थे। 2008 में 36 आईपीओ से 4.5 अरब डॉलर की राशि जुटी थी। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटने की वजह से 2011 के कैलंडर साल में घरेलू कंपनियों ने 34 आईपीओ के जरिये 1.14 अरब डॉलर ही जुटाए हैं।