यह ख़बर 24 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

मुद्रास्फीति के साप्ताहिक आंकड़े अब जारी नहीं होंगे

खास बातें

  • हर सप्ताह जारी होने वाले खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े अब जारी नहीं होंगे। सरकार ने इस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया है।
नई दिल्ली:

हर सप्ताह जारी होने वाले खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े अब जारी नहीं होंगे। सरकार ने इस प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया है। उसका मानना है कि हर सप्ताह जारी होने वाले ये आंकड़े वस्तुओं की मूल्य स्थिति की पूरी तस्वीर पेश नहीं करते।

सूत्रों ने बताया कि सरकार अब मुद्रास्फीति के केवल मासिक आंकड़े ही जारी करेगी। यह निर्णय केन्द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की मंगलवार को बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की।

बैठक के बाद एक अधिकारी ने बताया ‘खाद्य मुद्रास्फीति के साप्ताहिक आंकड़ों और मासिक मुद्रास्फीति के आंकड़ों में काफी अंतर होता है, इसलिये यह तय किया गया है कि साप्ताहिक आंकडों को आगे जारी नहीं किया जाए।’ उन्होंने कहा कि साप्ताहिक आंकडे मुद्रास्फीति की स्थिति की स्पष्ट और पूरी तस्वीर पेश नहीं करते हैं।

अधिकारी ने बताया कि अब सरकार थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मासिक मुद्रास्फीति के ही आंकडे जारी करेगी। यानी महीने में केवल एक बार ही मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी होंगे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय थोक मूल्य सूचकांक :डब्लयूपीआई: पर आधारित प्राथमिक वस्तुओं के मुद्रास्फीति आंकडे हर सप्ताह गुरुवार को जारी करता है। प्राथमिक वस्तुओं के समूह में खाद्य वस्तुओं के साथ साथ इ’धन, बिजली और प्रकाश समूह के मुद्रास्फीति आंकड़े भी जारी होते हैं।

मासिक मुद्रास्फीति के आंकड़े हर महीने की 14 तारीख को जारी किये जाते हैं। सकल थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य मुद्रास्फीति का करीब 14 प्रतिशत भारांश है। गत सात जनवरी के खाद्य मुद्रास्फीति आंकड़ों में यह शून्य से नीचे 0.42 प्रतिशत रही है जबकि सकल मुद्रास्फीति का आंकड़ा दिसंबर में 7.47 प्रतिशत रहा है।

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सरकार ने सितंबर 2010 में थोक मूलय सूचकांका का आधर वर्ष 1993-94 से बदलकर 2004-05 कर दिया था। थोक मूल्य सूचकांक की नई श्रंखला में 241 और वस्तुओं को शामिल किया गया इसे मिलाकर कुल 676 वस्तुएं इसमें शामिल हैं। इससे पहले हर सपताह सकल मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी होते थे लेकिन अक्तूबर 2009 में सरकार ने साप्ताहिक आधर पर केवल प्राथमिक वस्तुओं के आंकड़े ही जारी करने शुरु किये जबकि सकल मुद्रास्फीति आंकड़ा महीने में एक बार आने लगा।