नई दिल्ली: भारत में 2014 में नई सरकार के गठन के बाद से कालेधन पर सख्त कार्रवाई की अपेक्षा में स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन 10 प्रतिशत घटकर करीब 12,615 करोड़ रुपये रह गया है। नई आंकड़ों के अनुसार टैक्स हैवन कहे जाने वाले देश स्विट्जरलैंड के बैंकों में विदेशियों के जमा धन की सूची में भारत खिसककर 61वें स्थान पर आ गया है। बताया जा रहा है कि स्विट्जरलैंड की बैंकिंग प्रणाली में 1,600 अरब डॉलर का विदेशी धन जमा है, इसमें भारत का हिस्सा मात्र 0.123 प्रतिशत है।
उल्लेखनीय है कि इस देश में ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों का धन सबसे ज्यादा जमा है। ये दोनों देश शीर्ष दो स्थानों पर क्रमश: कायम हैं। वहीं, भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से पैसा जमा करने का क्रम जारी है और जहां भारत नीचे खिसक रहा है वहीं, पाकिस्तान इस सूची में चढ़कर 73वें स्थान पर आ गया है।
खास बात यह है कि स्विस बैंकों में जमा विदेशी धन में से लगभग दो-तिहाई सिर्फ दो बैंकों यूबीएस व क्रेडिट सुइस में जमा है। भारतीयों के कुल धन में से 82 प्रतिशत इन दो बैंकों में जमा है। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकरण स्विस नेशनल बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2014 में स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन 10 प्रतिशत घटकर 1.8 अरब स्विस फ्रैंक (1.98) अरब डॉलर या 12,615 करोड़ रुपये रह गया है। यह स्विस बैंकों में रखे कुल विदेशी धन का मात्र 0.123 प्रतिशत बैठता है।
आकड़े यह बताते हैं कि यह स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन का दूसरा निचला स्तर है। इससे पहले 2013 में इसमें करीब 40 प्रतिशत की बढो़तरी हुई थी। यह आंकडे ऐसे समय आए हैं जबकि स्विट्जरलैंड पर अपनी गोपनीयता की आड़ लेने के आरोप लगते रहे हैं और तमाम देश जो काले धन की समस्या से दो चार हो रहे हैं वे लगातार ऐसे लोगों के नाम उजागर करने की मांग कर रहे हैं जो अपने वतन में टैक्स चोरी कर रहे हैं।
जांच से पता चलता है कि भारतीयों के जमा धन के मामले में बड़े खातों का हिस्सा 1.48 अरब स्विस फ्रैंक है, जो एक साल पहले 1.36 अरब स्विस फ्रैंक था। 2014 के अंत तक स्विट्जरलैंड में 275 बैंक थे।
इस वजह से पाकिस्तान विदेशियों के जमा धन की सूची में 73वें स्थान पर आ गया है। इस सूची में पहले दस स्थानों पर ब्रिटेन, अमेरिका, वेस्ट इंडीज, ग्यूर्नसे, जर्मनी, बहामास, लग्जमबर्ग, फ्रांस, जर्सी और हांगकांग हैं।