खास बातें
- टाटा ने कहा कि निश्चित रूप से चीन, पाकिस्तान की मदद कर रहा है और उसे हथियारों की आपूर्ति कर रहा है और यह भारत के लिए उकसाने वाला है।
नई दिल्ली: टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा है कि उनकी राय में चीन की आर्थिक ताकत का दबदबा भारत के लिए चिंता का विषय नहीं है और भारत को उत्तर के अपने इस पड़ोसी के साथ मित्रता का रास्ता निकालना होगा। उन्होंने कहा कि ‘भारत-चीन के बीच दुश्मनी नहीं है लेकिन संबंध बहुत अच्छे भी नहीं है।’
उन्होंने कहा, आप जानते हैं कि चीन ने भारत के खिलाफ कभी भी विरोधी का काम नहीं किया और मेरे हिसाब से भारत को चिंता है कि चीन की तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति भारत को दबा न दे।
यह पूछे जाने पर क्या वह चीन को लेकर चिंतित हैं, उन्होंने कहा, नहीं, मैं चिंतित नहीं हूं। मेरी इच्छा है कि हमें अच्छी मित्रता का रास्ता निकालना चाहिए।
एक साक्षात्कार में टाटा ने कहा, मेरा पूरा विश्वास है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला है। उन्होंने कहा, मैं चीन के साथ सतत मजबूत संबंधों को तरजीह दूंगा और मुझे लगता है कि यह किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच जटिल प्रकृति का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा, मेरे हिसाब से भारत की तरफ से यह चिंता है कि चीन क्षेत्र (एशिया) में प्रभावशाली बनने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ चीन में भी यही चिंता है कि भारत क्षेत्र में प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। टाटा ने आगे कहा कि निश्चित रूप से चीन, पाकिस्तान की मदद कर रहा है और उसे हथियारों की आपूर्ति कर रहा है और यह भारत के लिए उकसाने वाला है।
कार बाजार के रूप में चीन की स्थिति के बारे में टाटा ने कहा, चीन में बाहर की कार बेचना बड़ा मुश्किल काम है। जेएलआर का हमने अधिग्रहण किया है। यह चीन में कारखाना लगा रही है क्योंकि चीन वह कार तो चाहता है पर टाटा मोटर्स से नहीं। उन्होंने कहा कि टाटा समूह चीन से वाहनों के उपकरण लेने पर विचार करेगी। इस क्षेत्र में चीन ने काफी प्रगति की है।
टाटा ने कहा, चीन ने वाहन क्षेत्र में अल्पकाल में काफी कुछ हासिल किया है, उन्होंने कारें बनाई हैं। वास्तव में भारत ने उतने ही समय में जो कुछ किया है, चीन उससे आगे निकल गया है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर टाटा ने कहा, स्थिति थोड़ी खराब है। उनके अनुसार यूरोप तथा ब्रिटेन को पुनरुद्धार के रास्ते पर लौटने में वक्त लगेगा, इसके लिए काफी प्रयास करने होंगे..।
हालांकि उन्होंने कहा कि यूरोप के मुकाबले अमेरिका में आर्थिक पुनरुद्धार तेजी से होगा। इसका कारण वहां की शोधपरक उद्यमशिलता है। टाटा ने कहा कि एशिया, अफ्रीका तथा लातिन अमेरिका के कुछ भागों में काफी मौके हैं। उन्होंने कहा कि एशियाई देशों के बीच आपास में व्यापार पहले के मुकाबले ज्यादा रह सकता है।