यह ख़बर 04 मार्च, 2013 को प्रकाशित हुई थी

कृषि ऋण पर जोर से बढ़ सकता है एनपीए : इंडिया रेटिंग्स

खास बातें

  • घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने आगाह किया है कि आम बजट में कृषि क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिए जाने से सार्वजनिक बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) यानी वसूली में उलझी ऋण की किश्तें और बढ़ सकती हैं।
मुंबई:

घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने आगाह किया है कि आम बजट में कृषि क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिए जाने से सार्वजनिक बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) यानी वसूली में उलझी ऋण की किश्तें और बढ़ सकती हैं।

आम बजट (2013-14) में कृषि ऋण में 22 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया है।

एजेंसी ने आम बजट को सार्वजनिक बैंकों के लिए मिलाजुला जबकि निजी बैंकों के लिए अच्छा बताया है। इंडिया रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक आनंद भौमिक ने कहा, इस बजट में 14,000 करोड़ रुपये की शेयर पूंजी सहायता के प्रावधान से सार्वजनिक बैंकों को फायदा पहुंचाएगा। कर मुक्त बांड निर्गमों से बैंकों पर ढांचागत ऋणों के लिए दबाव भी कम होगा, कृषि ऋण पर सतत जोर दिए जाने से वसूली की समस्या बढ़ा सकती है। सार्वजनिक बैंकों के लिए मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कृषि मोर्चे पर एनपीए सबसे ऊंचा रहा है।

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केयर रेटिंग्स की रपट के अनुसार, दिसंबर 2012 के अंत में वसूल न हो रहे ऋणों का अनुपात 42.6 प्रतिशत बढ़कर 18300 अरब रुपये हो गया। यह दिसंबर 2011 में 12800 अरब रुपये था। आम बजट में अगले वित्त वर्ष में कृषि ऋण में 21.7 प्रतिशत वृद्धि कर इसे 7000 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है।