यह ख़बर 28 मई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

अर्थव्यवस्था पर कड़े फैसले लेने को प्रतिबद्ध है भारत : मनमोहन सिंह

खास बातें

  • जापानी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए लुभाने के मिशन पर आए सिंह ने जापानी उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि जीएसटी अगले साल तक ‘उचित तरीके से’ लागू कर दिया जाएगा। जीएसटी की प्रतीक्षा लम्बे समय से है। फिलहाल राज्यों की कुछ आपत्तियों के चलते यह नयी कर प्रणाल
तोक्यो:

अपनी अर्थव्यवस्था के दीर्घावधि के हित के लिए भारत ‘कड़े और कठिन’ फैसले लेने को प्रतिबद्ध है। जापान यात्रा पर आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को यह बात टोक्यो में यहां के उद्यमियों को संबोधित करते हुए कही।

जापानी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए लुभाने के मिशन पर आए सिंह ने जापानी उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अगले साल तक ‘उचित तरीके से’ लागू कर दिया जाएगा। जीएसटी की प्रतीक्षा लम्बे समय से है। फिलहाल राज्यों की कुछ आपत्तियों के चलते यह नयी कर प्रणाली लागू नहीं हो सकी है।

जापान के प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल केइदानरेन की बैठक में मेजबान देश के शीर्ष उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच 18 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है जो आपसी व्यापार की असीमित संभावनाओं के आगे कुछ खास नहीं है।

जापानी उद्यमियों ने प्रधानमंत्री से कुछ खोजपर सवाल भी पूछे। जापानी उद्योगपति चाहते हैं कि भारत में कर व्यवस्था में सुधार हो, वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए बैंकों पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को एक न्यूनतम स्तर तक ऋण देने की अनिवार्यता में नरमी लायी जाए तथा विदेशी बैंकों को महानगरों में अधिक शाखाएं खोलने की अनुमति देने के नियम आसान किए जाए।

सिंह ने कहा, ‘‘हमारे लोगों ने तेज वृद्धि का लाभ उठाया है। वे अब उससे कम पर नहीं मानने वाले हैं। मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार अर्थव्यवस्था के दीर्घावधि के हितों में कड़े और कठिन फैसले लेने को प्रतिबद्ध है।’’

मित्सुबिशी कारपोरेशन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय राज्य में अलग-अलग कर व्यवस्था की वजह से जापानी निवेशकों को कठिनाई आती है और इससे जटिलताएं पैदा होती है। वे जानना चाहते हैं कि जीएसटी को कब तक लागू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘‘भारत में संघीय प्रणाली है। उसमें राज्यों को कराधान का अधिकार छोड़ने के लिए राजी करना आसान काम नहीं है। लेकिन मुझे भरोसा है कि हम बाधा पार कर लेंगे। हम इस पर काम कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा राज्यों को इसके लिए राजी करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत है और साथ ही ज्यादा उत्साह वाले प्रयासों की आवश्यकता है।’’

उल्लेखनीय है कि कई गैर-कांग्रेसी सरकारों वाले राज्य जीएसटी का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र उनके अधिकारों में दखल का प्रयास कर रहा है और इससे उनकी राजकोषीय स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

सिंह ने कहा, ‘‘ऐसे में हम यह नहीं कह सकते कि यह काम कल हो जाएगा, लेकिन यदि आप मुझसे पूछें तो 2014 का आम चुनाव संपन्न होने के बाद जो भी सरकार आएगी, वह भारत की आर्थिक वृद्धि की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए (इस पर) समुचित प्रकार की आम सहमति सहमति जरूर बनाएगी।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए किए गए उपायों से चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कहीं अधिक यानी छह प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। ‘‘हम 2014-15 में और अच्छा प्रदर्शन करेंगे।’’

केइदानरेन के चेयरमैन हिरोमासा योनेकुरा ने कहा कि जापानी निवेशक निजी-सार्वजनिक-भागीदारी को आगे बढ़ाने को काफी इच्छुक हैं, लेकिन भारत में जटिल कर प्रणाली की वजह से उन्हें अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री सिंह ने जापानी निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार इन अड़चनों को दूर करने को प्रतिबद्ध है और देश आठ फीसद की वृद्धि दर के रास्ते पर लौट सकता है।

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) नियमों को उदार बनाने के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कड़ा तकनीकी सवाल है, जिसका जवाब वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के पास है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में कहा, ‘हम जितना ऊंचा उठते जाते हैं, निचले स्तर के बारे में हमारी जानकारी उतनी कम होती जाती है।’

सिंह ने कहा कि विदेशी बैंकों के लिए खुद को पीएसएल नियमों के अनुरूप ढालना ज्यादा सरल है। उनकी सरकार जापानी औद्योगिक निवेशकों के लिए भारत में सुखद परिस्थिति उपलब्ध कराने के लिए हर संभव उपाय करेगी ताकि भारत में उनकी उपस्थिति बढ़ सके।

भारतीय उद्योग क्षेत्र के आधुनिकीकरण में जापानी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक सुधारों की अवधि के बाद मारुति सुजुकी की भागीदारी भारत में घर-घर में चर्चित हो चुकी है। सिंह तीन दिन यात्रा पर कल यहां पहुंचे।

उन्होंने कहा कि भारत में ऊंचे स्तर की प्रतिस्पर्धा के रास्ते में एक सबसे बड़ी अड़चन गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे की है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 1,000 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसमें से आधा निवेश निजी क्षेत्र से सार्वजनिक निजी भागीदारी के जरिये आएगा।

सिंह ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि जापानी उद्योग भारत द्वारा पेश किए जाने वाले भारी निवेश के अवसरों का फायदा उठाएंगे।’’ प्रधानमंत्री ने बताया कि दिल्ली और मुंबई के बीच मालगाड़ियों के लिए विशेष मार्ग (डीएफसी) का काम 2017 तक पूरा करने की योजना है। पहले चरण के सिविल कार्यों के लिए खरीद कार्य चल रहा है और निर्माण जल्द शुरू होगा। डीएफसी परियोजना के लिए इंजीनियरिंग सेवा परामर्श चरण-दो का काम भी शुरू किया गया है।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि जापानी कंपनियां दोनों चरणों में उत्साह के साथ हिस्सा लेंगी। सिंह ने कहा कि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे (डीएमआईसी) के कार्य की प्रगति भी अच्छी है और अब यह योजना से क्रियान्वयन के चरण में है। जापान द्वारा डीएमआईसी के लिए उपलब्ध कराई गई 4.5 अरब डॉलर की राशि की पहली किस्त से कई प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने डीएमआईसी परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का मसला सुलझा लिया है।

‘‘विदेशी मुद्रा उधारी पर लगे प्रतिबंधों को उदार बनाया गया है। मुझे पता है कि दीर्घावधि के अदला-बदली (स्वैप) करार को लेकर कुछ समस्याएं बनी हुई हैं। हम इन समस्याओं के समाधान के लिए नवप्रवर्तन वाले विचारों का स्वागत करेंगे।’’

जापान ने मुंबई-अहमदाबाद द्रुत गति के रेलवे मार्ग के लिए वित्तीय और तकनीकी सहयोग की पेशकश की है। प्रधानमंत्री सिंह ने कहा, ‘‘यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और हमें इस पर पूर्णतावादी रुख अपनाने की जरूरत है। इसके लिए हमें बुनियादी ढांचा, व्यावसायिक व्यवहार्यता, कुल राष्ट्रीय प्राथमिकताओं तथा वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर ध्यान देने की जरूरत है।

चेन्नई-बेंगलूर औद्योगिक गलियारे का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि यह भविष्य के जापानी औद्योगिक सहयोग का एक और विस्तार होगा।

सिंह ने कहा कि दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए ऊर्जावान तरीके से बातचीत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन, स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी और निचले ग्रेड के भूरे रंग के कोयले के उन्नयन में जापानी निवेश का हम स्वागत करेंगे।

जापान की स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी पर एक प्रदर्शनी सितंबर में भारत में आयोजित की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के शोध संस्थानों द्वारा एशियाई आयातकों के लिए एलएनजी की कीमत पर एक अध्ययन किया जा रहा है। यह इस साल के अंत तक तैयार होगा।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भारत में कौशल विकास केंद्र स्थापित करने के लिए जापान के साथ भागीदारी की उम्मीद कर रही है। दोनों पक्षों के बीच पहले से नई पीढ़ी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद के लिए सहयोग चल रहा है।

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प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत व्यावसायिक संबंध दोनों के ही रणनीतिक हित में है और इससे एशिया और आगे समृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा।