यह ख़बर 16 जून, 2013 को प्रकाशित हुई थी

काले धन पर खुलासे के लिए भारत ने किया कर पनाहगाह देशों से संपर्क

खास बातें

  • भारत ने सिंगापुर सहित करीब आधा दर्जन कर पनाहगाह देशों से विदेशों में गोपनीय खाते रखने वाले करीब 500 लोगों और इकाइयों की बैंकिंग और अन्य वित्तीय गतिविधियां की जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क किया है।
नई दिल्ली:

भारत ने सिंगापुर सहित करीब आधा दर्जन कर पनाहगाह देशों से विदेशों में गोपनीय खाते रखने वाले करीब 500 लोगों और इकाइयों की बैंकिंग और अन्य वित्तीय गतिविधियां की जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क किया है।

अमेरिका के एक कार्यकर्ता समूह इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टीगिव (आईसीआईजे) जर्नलिस्ट ने वैश्विक स्तर पर गोपनीय खातों का खुलासा किया। इस खुलासे में 505 भारत से संबंधित इकाइयों के नाम व पते शामिल हैं। इनमें उद्योगपति और कंपनियां शामिल हैं।

आईसीआईजे के इस खुलासे में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत और चंडीगढ़ और कई अन्य भारतीय शहरों की इकाइयों के नाम व पते हैं।

सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय के अंतर्गत विदेशी कर और कर अनुसंधान (एफटीएंडटीआर) विभाग ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमैन आइलैंड तथा सिंगापुर से कर आदान प्रदान संधि के तहत संपर्क किया है।

इसके अलावा एफटीएंडटीआर ने राजनयिक मार्गों से क्रूक्स आइलैंड्स और समोआ से भी संपर्क किया है। सूत्रों ने बताया कि कुछ अन्य देशों से भी उनके यहां भारतीयों के गोपनीय खातों के बारे में जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया है।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘जो शुरुआती जानकारी मिली है उससे तस्वीर अधिक साफ नहीं होती और ऐसे में आधिकारिक प्रोटोकॉल व्यवस्था तथा मौजूदा संधियों के तहत और ब्योरा मांगा जा रहा है।’’

आईसीआईजे का दावा है कि पिछले तीन दशक में इकाइयों द्वारा करीब एक लाख गोपनीय कंपनियों, ट्रस्टों और कोषों का गठन किया गया। इसका वैश्विक खुलासा आईसीआईजे ने इस साल अप्रैल में किया था, लेकिन नाम और पतों को कल ही सार्वजनिक किया गया। हालांकि, इसके साथ ही आईसीआईजे ने यह भी कहा है कि हो सकता है कि इन विदेशी कंपनियों और ट्रस्टों का कानूनी तरीके से इस्तेमाल किया गया हो। इस सूची का मतलब यह कतई नहीं है कि इन इकाइयों ने कानून तोड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि संबंधित देशों से आवश्यक जानकारी हासिल करने के बाद भारतीय अधिकारी आगे की कार्रवाई करेंगे।

सूत्रों ने कहा कि कुछ देशों से यह जानकारी दोहरा कराधान बचाव संधि और कर सूचना आदान प्रदान करार के तहत मांगी गई है। कुछ अन्य देशों से ओईसीडी के आपसी कर सहायक प्रोटोकॉल के तहत मांगी गई है। पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ताकतवर देशों के साथ भागीदार कर काले धन तथा कर अपराधों के खिलाफ अभियान चला रहा है।

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आईसीआईजे के अप्रैल में शुरुआती खुलासे के बाद वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि इस वैश्विक रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम है उनके खिलाफ जांच की जा रही है। इस खुलासे में भारत सहित 170 देशों के 2.5 लाख लोगों और इकाइयों का नाम शामिल है। इन इकाइयों ने कर पनाहगाह देशों में कंपनियों का गठन कर कर चोरी की है।