यह ख़बर 19 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

उभरती अर्थव्यवस्थाओं में संकट की चेतावनी

खास बातें

  • आईएमएफ ने कहा है कि सुधार तो हो रहे हैं, लेकिन उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादन की कमी और बेरोजगारी उच्च स्तर पर बनी हुई है।
वाशिंगटन:

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार भारत सहित जी-20 में शामिल उभरती अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर तो ऊंची रहने की सम्भावना है, लेकिन यहां मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ रहा है, जो कई अर्थव्यवस्थाओं में संकट पैदा होने के संकेत हैं। आईएमएफ ने पिछले सप्ताह यहां सम्पन्न हुई जी-20 के वित्त मंत्रियों व केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक के लिए तैयार की गई एक टिप्पणी में कहा है कि व्यापार और जैव ईंधन नीतियों ने हाल की खाद्य कीमतों में वृद्धि में भरपूर योगदान किया है। वैश्विक आर्थिक सम्भावनाएं एवं नीतिगत चुनौतियां विषय पर तैयार की गई टिप्पणी में कहा गया है कि जैव ईंधन उत्पादन के लिए नीतिगत समर्थन और उपभोग अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्राजील, और कुछ हद तक भारत सहित कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण बना हुआ है। आईएमएफ ने कहा है कि सुधार तो हो रहे हैं, लेकिन उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादन की कमी और बेरोजगारी उच्च स्तर पर बनी हुई है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नए बड़े आर्थिक खतरे तैयार हो रहे हैं। आईएमएफ ने कहा है कि सभी देश उपभोक्ता वस्तुओं की ऊंची कीमतों की चुनौती का सामना कर रहे हैं। ये कीमतें मजबूत मांग और अनिश्चित आपूर्ति के कारण बढ़ी हुई हैं। यह स्थिति उच्च मुद्रास्फीति की ओर अग्रसर हो रही है। वित्तीय खतरे कम हुए हैं, लेकिन नए खतरे पैदा हो गए हैं। आईएमएफ ने कहा है कि जी-20 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में सुधार अधिक आत्मनिर्भर हो रहा है। आईएमएफ ने आगे कहा है कि उत्पादन की कमी को घटाने के लिए वृद्धि दर बहुत निम्न स्तर पर बनी हुई है और बेरोजगारी अभी भी उच्च स्तर पर है। यह स्थिति संकट पूर्व के असंतुलनों के अनवरत प्रभावों व संकट सम्बंधी सम्भावित नुकसानों को जाहिर करती है।


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