यह ख़बर 19 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

भारत की सम्भावित विकास दर घटी है : आरबीआई

खास बातें

  • मुख्य दरों को अपरिवर्तित रखने के एक दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि उच्च विकास दर बरकरार रखने की भारत की सम्भाव्यता घटी है।
मुम्बई:

मुख्य दरों को अपरिवर्तित रखने के एक दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा कि उच्च विकास दर बरकरार रखने की भारत की सम्भाव्यता घटी है।

आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने एक औद्योगिक आयोजन में कहा, "अर्थव्यवस्था की सम्भावित विकास दर घटी है।"

उल्लेखनीय है कि 31 मार्च को समाप्त तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर नौ साल में सबसे कम 5.3 फीसदी दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 8.4 फीसदी थी।

उद्योग जगत से लगातार पड़ रहे दबाव के बाद भी आरबीआई ने सोमवार को मध्य तिमाही मौद्रिक नीति की घोषणा में मुख्य दरों को अपरिवर्तित रखा।

इंडियन मर्चेट्स चैम्बर्स की 104वीं सलाना आम बैठक को सम्बोधित करते हुए सुब्बाराव ने कहा कि सकल स्थायी पूंजी निर्माण दर 2008-09 के वैश्विक आर्थिक संकट से पहले की 15 फीसदी से अधिक दर से घटकर आधी से भी कम रह गई है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक वित्तीय घाटा, आपूर्ति पक्ष की बाधा, लगातार महंगाई, विपरीत बाहरी स्थिति भी विकास दर की सम्भावना पर दबाव डाल रही है।

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सुब्बाराव ने कहा कि सरकार को वित्तीय अनुशासन के लिए खर्चे में निश्चित रूप से कटौती करनी चाहिए।