खास बातें
- केंद्र सरकार ने बैंकों की घाटे में चल रही शाखाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है और बैंकों से कहा है कि वह ऐसी मौजूदा और नई शाखाओं को एक साल के भीतर मुनाफे में लाने की रणनीति तैयार करें।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बैंकों की घाटे में चल रही शाखाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है और बैंकों से कहा है कि वह ऐसी मौजूदा और नई शाखाओं को एक साल के भीतर मुनाफे में लाने की रणनीति तैयार करें। इसके लिए बैंकों के क्षत्रीय प्रबंधकों और मंडल प्रबंधकों पर जिम्मेदारी डाली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को हाल में भेजे एक निर्देश में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं के विभाग ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अनेक शाखाएं घाटे में चल रही हैं।
बैंकों से इन्हें घाटे से उबारने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने को कहा गया है। इनमें शाखाओं को अन्यत्र ले जाने और कर्मचारी संख्या घटाने जैसे कमद भी हैं। नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के महासचिव अश्विनी राणा ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा, ‘सरकार का यह कदम बैंकों के राष्ट्रीयकरण के उद्येश्यों के खिलाफ है। सरकारी बैंक केवल लाभ कमाने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनका एक बड़ा उद्येश्य दूरदराज तक बैंकिंग सेवा का विस्तार करना है।’
राणा ने कहा कि एक तरफ सरकार समावेशी बैंकिंग नीति के तहत गांव-गांव बैंकिंग नेटवर्क फैलाने की बात कर रही है, वहीं बैंक शाखाओं को बंद करने अथवा उन्हें हटाने बढ़ाने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इससे समावेशी कार्यक्रम को सफल बनाने में कई तरह की समस्यायें खड़ी हो सकतीं हैं।
चालू वित्तवर्ष में नाबार्ड सहित सरकारी क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं के पूंजीकरण के लिए 15,888 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है। स्टेट बैंक के पूंजी आधार को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में सरकार ने उसमें 7,900 करोड़ रुपये की पूंजी डाली।