खास बातें
- देश की प्रमुख आईटी कंपनी ने गुरुवार को कहा कि आर्थिक सुधारों पर राजनीतिक फैसले करने को लेकर सरकार के भीतर एक तरह की 'जड़ता' घर कर गई है।
बेंगलूर: देश की प्रमुख आईटी कंपनी ने गुरुवार को कहा कि आर्थिक सुधारों पर राजनीतिक फैसले करने को लेकर सरकार के भीतर एक तरह की 'जड़ता' घर कर गई है।
कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी वी बालाकृष्णन ने कहा, 'मेरी राय में आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर राजनीतिक फैसले करने में सरकार के भीतर एक तरह की जड़ता आ गयी है। इसका असर भारत के बारे में निवेशकों सोच पर पड़ रहा है और बाहर से आने वाला निवेश प्रभावित हो रहा है।'
रुपए की विनिमय दर की भविष्य की दिशा के बारे में एक सवाल पर उन्होंने कहा कि लंबे समय से भारत के भारी व्यापार घाटे को देखते हुए, रुपये में मजबूती के बजाए कमजोरी के ही अधिक मौके दिखते हैं। वर्ष 2011 में रपया एशियाई मुद्रा में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही।
बालाकृष्णन ने कहा कि अगले कुछ महीनो में रुपया अमेरिकी मुद्रा की तुलना में 50-55 रुपये प्रति डालर के दायरे में रहेगा लेकिन दीर्घकालिक स्तर पर इसमें केवल और गिरावट ही आएगी।