यह ख़बर 23 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'विकसित देशों में कमजोर वृद्धि का भारत पर पड़ेगा असर'

खास बातें

  • दुनिया के विकसित देशों में आर्थिक वृद्धि की दर कमजोर रहने पर भारत के व्यापार और पूंजी निवेश पर असर पड़ सकता है।
चेन्नई:

दुनिया के विकसित देशों में आर्थिक वृद्धि की दर कमजोर रहने पर भारत के व्यापार और पूंजी निवेश पर असर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा कि वैश्विक बाजारों में अनिश्चित स्थिति के चलते देश के विदेश व्यापार और पूंजी प्रवाह पर असर पड़ सकता है। रंगराजन ने हालांकि वर्ष 2008.09 की तरह मंदी के एक और दौर की संभावनाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उल्लेखनीय है कि लेहमन ब्रदर्स के डूबने के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में मंदी का दौर शुरु हो गया था। रंगराजन ने कहा, विकसित देशों के मंदी में जाने की संभावना बहुत ज्यादा नहीं है। इन देशों की वृद्धि दर धीमी रह सकती है लेकिन मंदी का मतलब होता है पिछले साल की तुलना में गिरावट जो कि नकारात्मक दर होती है, मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों के मामले में आर्थिक वृद्धि को लेकर कुछ चिंताएं हैं क्योंकि यूरोप में ऋण संकट अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। रंगराजन ने कहा कि इस तरह के भी संकेत हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी कमजोर पड़ रही है। इन सब बातों से यह एहसास बढ़ रहा है कि दुनिया को जितनी तेजी से बढ़ना चाहिए था उतनी तेजी से वह आगे नहीं बढ़ पा रही है। रंगराजन ने कहा कि अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए प्रयास कर रहा है और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने में एक दो महीने लग सकते हैं।


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