एक्सक्लूसिव : रतन टाटा के करीबी सूत्रों ने कहा, 'टाटा परिवार की खास संपत्तियां खतरे में थीं'

एक्सक्लूसिव : रतन टाटा के करीबी सूत्रों ने कहा, 'टाटा परिवार की खास संपत्तियां खतरे में थीं'

खास बातें

  • 'साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बारे में कई महीने से विचार हो रहा था'
  • डोकोमो मामला ही कथित रूप से 'ब्रेकिंग प्वाइंट' साबित हुआ
  • जो वकील सालों से रतन टाटा को सलाह दे रहे थे, उनसे साइरस ने बात नहीं की
नई दिल्ली:

हिन्दुस्तान के सबसे बड़े बिज़नेस ग्रुप के चेयरमैन पद से साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के एक ही दिन बाद अंतरिम चेयरमैन के रूप में वापस लाए गए रतन टाटा के करीबी सूत्रों ने आरोप लगाया है कि साइरस मिस्त्री 'टाटा की खास संपत्तियों (यानी यूके में ग्रुप के स्टील कारोबार से जुड़े हितों) को बेचना चाहते थे', और टाटा ग्रुप से हाल ही में एक मुकदमे में 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर हासिल करने वाली डोकोमो कंपनी के साथ हुए कड़वे अनुभव में 'गड़बड़ियों के लिए रतन टाटा को ज़िम्मेदार ठहराना चाहते थे...'

चार साल पहले 'टाटा परिवार से बाहर के पहले चेयरमैन' के रूप में 100 देशों में कंपनियां चलाने वाले 103 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति वाले ग्रुप के शीर्ष पद पर बिठाए गए 48-वर्षीय साइरस मिस्त्री को अचानक हटाए जाने से दोनों पक्षों की ओर से आरोपों का दौर शुरू हो गया है.

सूत्रों ने जिन शब्दों में साइरस मिस्त्री के बारे में बात की, उनसे उनकी खराब छवि और उनके बारे में उपजे संदेह के बारे में साफ पता चलता है. रतन टाटा के करीबी सूत्रों ने बताया कि साइरस मिस्त्री और बोर्ड के बीच उपजे मतभेदों के बाद उन्हें हटाए जाने के बारे में कई महीने से विचार हो रहा था.

साइरस मिस्त्री टाटा सन्स में सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक शापूरजी पैलोनजी परिवार के सदस्य हैं, और परिवार के प्रवक्ता का कहना है, "अभी परिस्थितियों का अध्ययन किया जा रहा है, सो, इस समय मुकदमा किए जाने के बारे में मीडिया में आ रही ख़बरें आधारहीन हैं..."

नाम न छापे जाने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि डोकोमो मामला ही कथित रूप से 'ब्रेकिंग प्वाइंट' साबित हुआ. वर्ष 2009 में जापानी कंपनी डोकोमो ने टाटा टेलीसर्विसेज़ लिमिटेड में 26.5 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी, लेकिन वर्ष 2014 में उन्होंने संयुक्त उपक्रम से बाहर निकलने की घोषणा कर दी, जो अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ग्राहकों तक पहुंच नहीं बना पाया. इसके बाद डोकोमो ने टाटा से उसके हिस्से के लिए एक खास कीमत पर खरीदने वाला ग्राहक ढूंढने का आग्रह किया. टाटा ऐसा कोई ग्राहक ढूंढने में नाकाम रही, लेकिन उसने खुद ही वह हिस्सा खरीदने की पेशकश की. टाटा की इस पेशकश को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने मंज़ूरी नहीं दी, और कहा कि यह नए नियमों का उल्लंघन होगा. इसके बाद डोकोमो ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में केस कर दिया, और आखिरकार उन्हें सेटलमेंट के रूप में 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर हासिल हुए.

सूत्रों ने बताया कि जो वकील सालों से रतन टाटा को सलाह-मशविरा देते रहे थे, उनसे साइरस मिस्त्री ने कभी बात नहीं की, और इस वजह से अविश्वास बढ़ा, और टाटा कैम्प में यह यकीन मजबूत हुआ कि इस 'व्यापारिक गड़बड़ी' के लिए उन्हें (रतन टाटा को) ही 'बलि का बकरा' बनाया जाएगा.

टाटा ग्रुप में इस बात को लेकर भी चर्चाएं होने लगी थीं कि साइरस मिस्त्री 'टाटा परिवार की खास संपत्तियों को बेचना चाहते थे', और वह 'टाटाओं के फैसलों से हासिल फायदों को गंवाते जा रहे थे...' दरअसल, ऐसी चर्चाओं ने तब ज़ोर पकड़ा, जब साइरस मिस्त्री ने यूके में कंपनी के पूरे स्टील कारोबार को बेचने का फैसला किया, जिसकी खराब हालत के लिए सस्ते चीनी आयात, बढ़ती लागत और कमज़ोर मांग को आधार बताया गया.

इसके अलावा रिट्ज़ कार्लटन ग्रुप से खरीदा गया टाटा बोस्टन होटल बेचने का फैसला और ताज के न्यूयार्क स्थित होटल को भी बेचने का इरादा बना लेना 'टाटा परिवार की खास संपत्तियों को बेचना' जारी रखने की मंशा ही माना गया.

इसके अलावा ग्रुप द्वारा रतन टाटा की देखरेख में वर्ष 2008 में अधिग्रहीत किए गए ब्रिटिश कार ब्रांड जेएलआर - जगुआर लैंड रोवर में कोई बड़ा निवेश लाने में नाकाम रहने का आरोप भी साइरस मिस्त्री पर लगा है.

सोमवार को काफी लंबी चली एक बैठक में बोर्ड ने साइरस मिस्त्री को हटाने का फैसला किया, जिसमें नौ में से छह सदस्यों ने मिस्त्री को हटाए जाने के फैसले का अनुमोदन किया. दो सदस्य गैरहाज़िर थे. वोट नहीं दे पाए साइरस मिस्त्री बोर्ड पर निदेशक की हैसियत से मौजूद रहेंगे.


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