खास बातें
- ईपीएफओ अपने अभिदाताओं के लिए न्यूनतम पेंशन हर महीने 1,000 रुपये निर्धारित करने पर विचार कर रहा है। इस मुद्दे पर न्यासियों की 23 दिसंबर को होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी।
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने अभिदाताओं के लिये न्यूनतम पेंशन हर महीने 1,000 रुपये निर्धारित करने पर विचार कर रहा है। इस मुद्दे पर न्यासियों की 23 दिसंबर को होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी। मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ईपीएफओ का शीर्ष निकाय केंद्रीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाला केंद्रीय न्यासी बोर्ड 23 दिसंबर को होने वाली बैठक में अपने अभिदाताओं को पेंशन 1,000 रुपया मासिक तय करने पर विचार करेगा। ईपीएफओ के आंकड़े के अनुसार मार्च 2010 तक संगठन से जुड़े 35 लाख पेंशनभोगी थे। इनमें से 14 लाख लोगों को मासिक पेंशन 500 रुपये से कम मिल रहा था। एक हजार रुपया मासिक पेंशन पाने वाले अभिदाताओं की संख्या 7 लाख है। ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार कुछ पेंशनभोगियों को मासिक पेंशन केवल 12 रुपये और 38 रुपये मिल रहा है। हिंद मजदूर सभा के सचिव एडी नागपाल ने कहा, मौजूदा परिदृश्य में जब उच्च मुद्रास्फीति के कारण रहन-सहन की लागत बढ़ गयी है, न्यूनतम पेंशन 2,000 रुपये मासिक से कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, देश में वरिष्ठ नागरिकों को मासिक पेंशन 400 रुपये से 1,000 रुपये महीने मिलता है जबकि इसके लिये उन्हें कोई योगदान भी नहीं देना पड़ता। हालांकि नियोक्ता एवं कर्मचारियों के प्रतिनिधि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये हर महीने तय करने पर सहमत हैं लेकिन अतिरिक्त कोष जुटाने के उपायों के बारे में अभी निर्णय नहीं हो पाया है। अनुमान के मुताबिक इस फैसले को अमल में लाने के लिये अभिदाताओं को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ता का 0.63 प्रतिशत अतिरिक्त योगदान देना होगा। योगदान में यह वृद्धि नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों के पेंशन खाते में दिये जाने वाले योगदान 8.33 प्रतिशत तथा सरकार द्वारा योजना के तहत दी दी जाने वाली 1.16 प्रतिशत के अतिरिक्त होगी। अगर सरकार अतिरिक्त लागत वहन करने का निर्णय करती है तो कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में संशोधन की जरूरत होगी। एक न्यासी ने कहा, यह संभव है कि अतिरिक्त बोझ बराबर-बराबर सरकार, कर्मचारी तथा नियोक्ता के बीच विभाजित किये जाने का निर्णय किया जाए। इसके अलावा न्यासी बोर्ड कुछ श्रेणी विशेषकर निर्माण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये बैंकिंग सेवा की तर्ज पर पासबुक जारी के प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकता है। ईपीएफओ के अभिदाताओं की संख्या 4.71 करोड़ है और संगठन 3.5 लाख करोड़ रुपये के कोष का प्रबंधन करता है। अनुमान के मुताबिक इस फैसले को अमल में लाने के लिये अभिदाताओं को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ता का 0.63 प्रतिशत अतिरिक्त योगदान देना होगा। योगदान में यह वृद्धि नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों के पेंशन खाते में दिये जाने वाले योगदान 8.33 प्रतिशत तथा सरकार द्वारा योजना के तहत दी दी जाने वाली 1.16 प्रतिशत के अतिरिक्त होगी। अगर सरकार अतिरिक्त लागत वहन करने का निर्णय करती है तो कर्मचारी पेंशन योजना :ईपीएस: में संशोधन की जरूरत होगी। एक न्यासी ने कहा, यह संभव है कि अतिरिक्त बोझ बराबर-बराबर सरकार, कर्मचारी तथा नियोक्ता के बीच विभाजित किये जाने का निर्णय किया जाए। इसके अलावा न्यासी बोर्ड कुछ श्रेणी विशेषकर निर्माण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये बैंकिंग सेवा की तर्ज पर पासबुक जारी के प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकता है। ईपीएफओ के अभिदाताओं की संख्या 4.71 करोड़ है और संगठन 3.5 लाख करोड़ रुपये के कोष का प्रबंधन करता है।