यह ख़बर 15 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विकास दर में गिरावट के बावजूद रोजगार बाजार में रौनक

खास बातें

  • संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2011-12 में कहा गया है कि पिछले लगातार तीन साल से नियुक्ति गतिविधियां ऊपर की ओर बनी हुई हैं।
नई दिल्ली:

देश की आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार घटने के बावजूद रोजगार बाजार पर असर नहीं हुआ है। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2011-12 में कहा गया है कि पिछले लगातार तीन साल से नियुक्ति गतिविधियां ऊपर की ओर बनी हुई हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर, 2011 में समाप्त एक साल की अवधि में देश में 9 लाख से अधिक नई नौकरियां जुड़ीं। इनमें से 8 लाख नौकरियां आईटी और बीपीओ क्षेत्र में मिलीं। समीक्षा में कहा गया है कि रोजगार के मोर्चे पर देश वैश्विक वित्तीय संकट से निपटने में सफल रहा है। 2009 से यहां नौकरियों का सृजन हो रहा है।

इसमें कहा गया है कि रोजगार सृजन का सरकार का कार्यक्रम दीर्घावधि के परिदृश्य से तैयार किया गया है और इनमें संरक्षणवाद का कोई तत्व नहीं है। समीक्षा में कहा गया है कि ग्रामीण परिवारों के जीवनस्तर को सुधारने के लिए शुरू किया गया मनरेगा कार्यक्रम काफी सफल रहा है। मनरेगा से न केवल रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, बल्कि इससे गरीबों को भी अतिरिक्त आमदनी मिली है। हालांकि इससे मांग बढ़ी है, जो ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति की वजह है।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत प्रत्येक परिवार को एक वित्तवर्ष में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। इसमें एक-तिहाई महिलाएं होनी चाहिए। समीक्षा में बताया गया है कि सितंबर, 2011 को समाप्त एक साल की अवधि में कुल रोजगार में 9.11 लाख की वृद्धि हुई। इनमें से 7.96 लाख नौकरियां आईटी-बीपीओ क्षेत्र में, 1.07 लाख धातु, 71 हजार वाहन, 8 हजार रत्न एवं आभूषण तथा 7 हजार चमड़ा उद्योग में दी गईं।