खास बातें
- वित्त मंत्री ने आने वाले महीनों को मुश्किल बताते हुए कहा कि रुपये पर दबाव बना रहेगा और चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दर 7.5 प्रतिशत से कम रह सकती है।
मुंबई:
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आने वाले महीनों को मुश्किल बताते हुए कहा कि रुपये पर दबाव बना रहेगा और चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दर 7.5 प्रतिशत से कम रह सकती है। उन्होंने कहा, ‘रुपये पर दबाव के पीछे मुख्य तौर पर वैश्विक परिस्थितियां ही जिम्मेदार है और जब तक यूरोप के सरकारी ऋण संकट का कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं होता है रुपये पर यह दबाव बना रहेगा।’
मुखर्जी एनडीटीवी बिजरनेस लीडरशिप पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही मुश्किल हो सकती है और वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत से नीचे गिर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 4.6 के अनुमानित राजकोषीय घाटे को हासिल करना मुख्य चुनौती होगी।
मुखर्जी ने कहा,‘चालू वित्त वर्ष में हमारे सामने आगे तीन महीने मुश्किल होंगे। वर्ष 2011.12 के लिए हमारी आर्थिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत या फिर इससे कम हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को समय के अनुरुप नीतियां बनाने के लिए तैयार रहना होगा। सुधार प्रणाली, नियामक ढांचे में सुधार और आने वाले संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए संस्थानों को तैयार रखना होगा।
मुखर्जी ने कहा रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बीच संतुलन जैसे मुख्य चिंताओं पर गौर करना होगा।
रिजर्व बैंक 24 जनवरी को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति की समक्षा पेश करेगा।