यह ख़बर 06 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

मंदी का खतरा बढ़ा, मुश्किल में सरकारें

खास बातें

  • जानकारों के मुताबिक आज ऐसे हालात 2008 की मंदी के कारण बने हैं और इस बार भी इसकी जड़ में अमेरिका और यूरोप के कुछ देश हैं।
New Delhi:

दुनिया भर की सरकारों की तमाम मदद के बावजूद कारोबार में एक बार फिर मंदी का खतरा बढ़ गया है। दुनिया भर के बाजार लुढ़क रहे हैं। अमेरिका में बेरोजगारी कम नहीं हो रही है और यूरोप के देश दिवालिया हो रहे हैं। ऐसे में भारत पर इसका असर न हो, ऐसा नहीं हो सकता। ये डबल डिप मंदी जैसे हालात हैं। डबल डिप मंदी, मंदी का वह रूप है, जिसका दोहराव कम समय के अंतराल पर होता है। जानकारों के मुताबिक आज ऐसे हालात 2008 की मंदी के कारण बने हैं और इस बार भी इसकी जड़ में अमेरिका और यूरोप के कुछ देश हैं। दो हफ्ते में अमेरिका के बाजार से 4.5 ट्रिलियन डॉलर यानि करीब 200 लाख करोड़ रुपये हवा हो गए हैं। अमेरिका के कर्ज का भार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानि 450 लाख करोड़ रुपये के आसपास है और अमेरिका को और कर्ज चाहिए। यूरोप में स्पेन, पौलेंड और इटली दिवालिया होने की कगार पर हैं। पहले और अब मंदी के खतरे में फर्क है। पहले नौकरियां और कारोबार बचाने के लिए सरकारें पैसा झोंकने को तैयार थीं, लेकिन अब सरकारें खुद इस लायक नहीं हैं कि वह मंदी को रोकने के लिए कोई दीवार खड़ी कर सकें।


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