यह ख़बर 12 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'सोच-विचार के बाद ही होंगे डीजल, एलपीजी नियंत्रण मुक्त'

खास बातें

  • पेट्रोलियम राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि सरकार डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर से नियंत्रण हटाने से पहले इसके असर पर अच्छी तरह से विचार करेगी।
नई दिल्ली:

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों पर से नियंत्रण हटाने से पहले इसका समाज के कमजोर तबके पर पड़ने वाले असर के बारे में अच्छी तरह से विचार करेगी। दसवें पेट्रो इंडिया कान्फ्रेंस में सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा, "नीति निर्माता के रूप में हमें ऊर्जा के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण से सम्बंधित पहलुओं के बीच तालमेल बिठाना पड़ता है।" सरकार ने पिछले साल जून में पेट्रोल की कीमत पर से नियंत्रण हटा लिया था, लेकिन डीजल, रसोई गैस और मिट्टी के तेल की कीमत पर सरकार का नियंत्रण बना हुआ है। मंत्री ने कहा कि सरकार को उपभोक्ता की रक्षा करने के साथ ही रियायती दर पर बिक्री करने वाली तेल एवं गैस विपणन कम्पनियों की भी रक्षा करनी है। सिंह ने कहा, "सरकार 75 फीसदी कच्चे तेल का आयात करती है इसलिए उसे उपभोक्ता के साथ विपणन कम्पनियों की भी रक्षा करनी चाहिए।" सिंह ने कहा कि रसोई गैस के मामले में सरकार को समाज के कमजोर तबकों को लक्षित करना चाहिए। मंत्री ने समाज के समृद्ध तबके को स्वेच्छा से रियायती दर पर गैस की खरीददारी बंद करने की अपील की। मौजूदा कारोबारी साल में सरकार पर 1,80,000 करोड़ रुपये की ऊर्जा सब्सिडी का बोझ पड़ेगा साथ ही रुपये में अवमूल्यन को देखते हुए इसके और भी बढ़ने की उम्मीद है। सिंह ने कहा कि पेट्रोलियम और गैस क्षेत्र में निवेश और बेहतर प्रौद्योगिकी को आकर्षित करने के लिए इस क्षेत्र में कीमतों में आवश्यक सुधार करने की जरूरत है।


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