क्या महंगे होंगे लोन? आज आरबीआई कर सकता है ऐलान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक में ये अहम फ़ैसला हुआ है. जानकारों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में रेपो रेट 6 बार में 2.50% बढ़ी है.

क्या महंगे होंगे लोन? आज आरबीआई कर सकता है ऐलान

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास.

नई दिल्ली:

आज गुरुवार को RBI गवर्नर शक्तिकांत दास रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी का ऐलान कर सकते हैं. फिलहाल रेपो रेट 6.50% है. अगर ऐसा होता है तो लोन लेना और महंगा हो जाएगा और लोगों पर ईएमआई का बोझ और बढ़ जाएगा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक में ये अहम फ़ैसला हुआ है. जानकारों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में रेपो रेट 6 बार में 2.50% बढ़ी है.

बता दें कि मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है. पिछले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली मीटिंग अप्रैल-2022 में हुई थी. तब RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था, लेकिन RBI ने 2 और 3 मई को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया था.

22 मई 2020 के बाद रेपो रेट में ये बदलाव हुआ था. इसके बाद 6 से 8 जून को हुई मीटिंग में रेपो रेट में 0.50% इजाफा किया गया था. इससे रेपो रेट 4.40% से बढ़कर 4.90% हो गई थी. फिर अगस्त में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे ये 5.40% पर पहुंच गई.

सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गईं थीं. फिर दिसंबर में ब्याज दरें 6.25% पर पहुंच गईं. इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 की आखिरी मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग फरवरी में हुई, जिसमें ब्याज दरें 6.25% से बढ़ाकर 6.50% कर दी गई थीं.

रेपो रेट क्या है What is Repo Rate
रेपो रेट का अर्थ होता है कि रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को दिए जाने वाले कर्ज की दर. बैंक इस चार्ज से अपने ग्राहकों को लोन प्रदान करता है. रेपो रेट कम होने का अर्थ है की बैंक लोगों को कम ब्याज दर पर लोन देगा और अगर यह बढ़ती है तो बैंक अपने लोन महंगा करता है और लोगों की ईएमआई भी बढ़ जाती है. या कहें तो लोन महंगे हो जाते हैं.

रिवर्स रेपो रेट क्या है What is Reverse Repo rate 

रेपो रेट के विपरीत होता है. नाम ही बता रहा है. यह वह दर है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा राशि पर ब्याज मिलता है. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी ज्यादा नकदी होती है (महंगाई ज्यादा होने के समय ऐसा होता है) तो आरबीआई रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है. इसका असर यह होता है कि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम आरबीआई के पास जमा करा देते हैं.

सीआरआर क्या है. What is CRR

बैंकिंग नियमों के तहत हर बैंक को अपने कुल कैश या कहें नकद का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है. इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो (CRR सीआरआर) या नकद आरक्षित अनुपात कहा जाता है. इसके बढ़ने का मतलब है कि बैंकों को आरबीआई के पास ज्यादा कैश रखना होगा और कम करने का मतलब यह है कि आरबीआई के पास कम कैश जमा रखना होगा. इस सूरत हाल में यदि बैंकों के पास कैश ज्यादा होगा तो बैंक उसका इस्तेमाल बाजार में कर पाएंगे और यदि कैश कम होगा तो उसके पास बाजार के लिए कम कैश होगा. 

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एसएलआर क्या है What is SLR
यह वह दर है जिसके अनुसार बैंकों पर यह बाध्यकारी है कि वह इस दर के अनुसार कैश हमेशा अपने पास बनाए रखें. इसे एसएलआर SLR (Statutory Liquidity Ratio) कहते हैं. इसका इस्तेमाल किसी जरूरत पर लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है.