खास बातें
- आरबीआई के गवर्नर डी सुब्बाराव ने गुरुवार को कहा कि सरकार तथा केंद्रीय बैंक को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है क्योंकि आरबीआई अपने बूते आर्थिक संकट से नहीं निपट सकता।
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी सुब्बाराव ने गुरुवार को कहा कि सरकार तथा केंद्रीय बैंक को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है क्योंकि आरबीआई अपने बूते आर्थिक संकट से नहीं निपट सकता।
सुब्बाराव ने कहा, ‘‘केंद्रीय बैंक अकेले आर्थिक समस्याओं से पार नहीं पा सकता। सरकार को भी राजकोषीय मोर्चे पर काम करने की जरूरत है। मौद्रिक तथा राजकोषीय नीतियों में तालमेल जरूरी है।’’
सीडी देशमुख स्मृति व्याख्यान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जोसेफ स्टिगिलिट्ज का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि साझा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मौद्रिक तथा राजकोषीय नीतियों में तालमेल होना चाहिए। ब्याज दर घटाने तथा नए बैंक लाइसेंस समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर रिजर्व बैंक तथा वित्त मंत्रालय के बीच असहमति के बीच सुब्बाराव का यह बयान आया है।
वित्त तथा वाणिज्य मंत्रालयों के संकेतों के बावजूद रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में कटौती नहीं की। वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने आश्वासन दिया है कि सरकार समय पर बैंकिंग कानून का संशोधन करेगी, इसके बावजूद रिजर्व बैंक ने बैंक लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
रिजर्व बैंक तीसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा 29 जनवरी को करेगी। इसमें नीतिगत ब्याज दरों में कटौती किए जाने की संभावना है।
सुब्बाराव ने आगे कहा कि आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए निवेशकों में विश्वास बढ़ाने के लिए कामकाज में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘उपभोक्ताओं तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए सरकारी कामकाज में सुधार की जरूरत है।’’