यह ख़बर 13 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

नए कंपनी विधेयक को लचीला रखने का प्रस्ताव

खास बातें

  • नए विधेयक में कुछ नई चीजें शामिल की गई हैं, इनमें सांविधिक ऑडिटरों को बदलना तथा स्वतंत्र निदेशकों को ज्यादा जिम्मेदारी देना शामिल हैं।
नई दिल्ली:

सरकार ने नई कंपनी विधेयक को लचीला रखने का प्रस्ताव किया है ताकि कंपनियों से जुड़े कानून में बिना किसी लंबी प्रक्रिया के आसानी से बदलाव किया जा सके। कंपनी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यूं तो कानून की किसी धारा में संशोधन एक लंबी प्रक्रिया है लेकिन कंपनी कानून में हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब भी जरूरी हो नियमों को निरंतर संशोधित और उसे अद्यतन किया जा सके। इससे नियमन में बदलाव तेजी से हो सकेगा और समय के साथ हम कानून में बदलाव कर सकेंगे। मंत्रालय संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के संदर्भ में कंपनी विधेयक, 2009 में संशोधन पर विचार कर रहा है। नए विधेयक में कुछ नई चीजें शामिल की गई हैं, इनमें सांविधिक ऑडिटरों को बदलना तथा स्वतंत्र निदेशकों को ज्यादा जिम्मेदारी देना शामिल हैं। विधेयक में छोटे शेयरधारकों के अधिकारों की सुरक्षा, कंपनियों पर अधिक उत्तरदायित्व के साथ साथ कंपनी की आंतरिक प्रक्रियाओं में सरकार का न्यूनतम हस्तक्षेप का सिद्धांत का पालन करने की व्यवस्था शामिल है। 14वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ कंपनी विधेयक, 2009 का अस्तित्व भी समाप्त हो गया था। इसे दोबारा पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया।


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