यह ख़बर 15 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

अग्रिम कर : तीसरी तिमाही में एक साल पूर्व स्तर पर

खास बातें

  • यह इस बात का संकेत है कि आर्थिक मोर्चे पर नरमी का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने लगा है।
मुंबई:

प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा अग्रिम कर का भुगतान तीसरी तिमाही में लगभग स्थिर रहा जो इस बात का संकेत है कि आर्थिक मोर्चे पर नरमी का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने लगा है। एलआईसी व बैंक ऑफ बड़ौदा ने जहां तीसरी तिमाही में अपेक्षाकृत अधिक अग्रिम कर का भुगतान किया वहीं एलएंडटी व जनरल इंश्योरेंस कारपोरेशन के लिहाज से यह राशि पिछले साल के समान ही रही। अग्रिम कर भुगतान को कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था तथा विशेषकर किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति का संकेत माना जाता है। इसमें गिरावट का मतलब लाभप्रदता में कमी है। आमतौर पर कंपनियां अग्रिम कर का भुगतान चार किस्तों में करती हैं और मौजूदा तिमाही में उन्हें सालाना कर देनदारी के 30 प्रतिशत का भुगतान करना है। एक वरिष्ठ कर अधिकारी ने आज बताया कि एलआईसी उन प्रमुख कंपनियों में है जिन्होंने आज अपने अग्रिम कर का भुगतान किया। कंपनी ने इस मद में 1,200 करोड़ रु का भुगतान किया है जबकि पहले यह राशि 1,070 करोड़ रु थी। शुरुआती सूची के अनुसार रिलायंस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टीसीएस, इन्फोसिस, एसबीआई, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अभी अग्रिम कर का भुगतान नहीं किया है। दवा कंपनी फाइजर तथा नोवार्तिस ने पिछले साल की तुलना में अधिक अग्रिम कर का भुगतान किया है। वहीं ग्लेक्सो इंडिया ने कम अग्रिम कर चुकाया है। जिन कंपनियों ने कोई अग्रिम कर नहीं दिया है उनमें इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम व हिंदुस्तान पेट्रोलियम भी है। अधिकारियों के अनुसार तेल कंपनियां आमतौर पर अंतिम तिमाही में करती हैं जबकि उन्हें सरकार से सब्सिडी मुआवजा मिलता है। तीसरी तिमाही के लिए सेंट्रल बैंक आफ इंडिया व देना बैंक ने भी अपेक्षाकृत कम अग्रिम कर का भुगतान किया है। 


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